डॉ. निहाल चन्द्र शिवहरे हिन्दी सम्मान समारोह 2022 में सम्मानित

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बिसौली। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. निहाल चन्द्र शिवहरे को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिलांतर्गत बिसौली में केबी हिन्दी सेवा न्यास के अष्टम अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मान समारोह में उनकी कृति “मेरी इक्यावन लघुकथाएँ ” के लिए प्रेमचंद स्मृति सम्मान “एवं उक्त कार्यक्रम में ही डा.मिथिलेश दीक्षित साहित्य -संस्कृति सेवा न्यास के प्रमुख प्रकल्प ‘माधवी फाउण्डेशन द्वारा हिन्दी भाषा एवं हिन्दी साहित्य के उन्नयन ,संवर्धन तथा प्रचार-प्रसार हेतु महनीय प्रयासों , कार्यों एवं योगदान हेतु “माधवी मनीषी” से सम्मानित किया गया ।सम्मान में अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह ,प्रमाण पत्र आदि प्रदान किये गये ।
अंतर्राष्ट्रीय साहित्य समारोह की अध्यक्षता देश की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मिथिलेश दीक्षित ने की।मुख्य अतिथि न्यूयार्क ( अमेरिका) से पधारे श्री इंद्रजीत शर्मा रहे। विशिष्ट अथिति अमेरिका से ही पधारे साहित्यकार श्री प्रेम भारद्वाज ‘ज्ञानभिक्षु’ , श्री मुकेश तिवारी ( म.प्र.),डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’ , हिंदी के कई नवीन छंदों के जनक पंडित ज्वाला प्रसाद शांडिल्य ‘दिव्य’ ( उत्तराखंड ), डॉ0ओंकारनाथ द्विवेदी रहे। उत्कृष्ट संचालन सम्भल के उभरते कवि श्री अतुल कुमार शर्मा ने किया।
इस अवसर पर जर्मनी ,ताइवान ,अमेरिका सहित देश विदेश के अनकों साहित्यकार एवं नगर के अनेकों गणमान्य नागरिक व साहित्यकार उपस्थित रहे।
आभार के.बी.हिंदी सेवा न्यास के महासचिव आशुतोष शर्मा ने व्यक्त किया।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।