एक लेखक और एक चोर

लेखक ने एक प्रसिद्ध चोर की कहानी लिखी जिससे उसे काफी ख्याति मिली। और लोग उस लेखक को चाहने लगे। उसकी कहानियों को पढने लगे।पर यह बात चोर को मालूम नही था।अपने चाहने वालों की वजह से लेखक बहुत मशहूर हो गया और धन दौलत भी काफी जमा हो गये।चोर को पता चला कि लेखक के घर में काफी दौलत है क्यों न चोरी की जाय। उसने अपनी योजना बनानी शुरू कर दी और एक रात फैसला किया कि आज लेखक के घर से सारा धन चुरा लेगे।रात काफी हो चुकी थी लेखक नित कहानी ही लिखता रहता था पर आज वो एक नयी और अदभूत कहानी लिख रहा था।रात काफी होने पर पत्नी ने कहा सो जाओ रात काफी हो चुकी है? लेखक ने घडी पर नजर डाली रात के साढे बारह बज रहे थे।चोर दाखिल हो चुका था और वह इस पोजीशन में था कि उन दोनो की बाते सुन रहा था।अचानक पत्नी को ख्याल आया तो उसने पूछा आखिर हमलोग इतने गरीब थे ऐसा क्या हुआ कि आज हमलोग भी धनवान हो गये लेखक ने बडी नम्रता से कहा इतना भी नही जानती ये सब एक कल्लू चोर की मेहरबानी है । पत्नी ने कहा भला चोर और मेहरबानी ये नही हो सकता? लेखक ने कहा ऐसा ही हुआ है एक दिन मैने कल्लू चोर पर कहानियाँ लिखी जो काफी मशहुर हुए और लोग मेरी कहानियों को पढने लगे तबसे आज तक मै कल्पनाओं को लेकर कहानी लिखता रहता हूँ पर आज जो कुछ भी मै हूँ उसी चोर की वजह से पता नही वो है भी या नही ये मै नही जानता।पर मेरी कहानी लोग जरूर पढते है।चोर सारी बाते ध्यानपूर्वक सून रहा था और अपने गुणगान पर खुश हो रहा था उसने सोचा आज तक जीतने भी घर में चोरी की कही भी कोई मेरी चर्चा नही की अगर कभी हुई भी तो गालिया ही पडी। यह पहला ऐसा व्यक्ति है जिसने मेरा तारीफ कर रहा है और मै कितना अभागा हूँ कि इसी के घर में चोरी की नीयत से आया हूँ।अतः उसने लेखक से मिलने का मन बनाया और दरवाजा खटखटाया लेखक ने दरवाजा खोला कौन हो तुम ? मै कालू चोर हूँ आपके घर चोरी करने आया हूँ?लेखक ने विनम्रतापूर्वक कहा! देखो मेरा तो सब कुछ तेरा ही दिया हुआ है तुम्हे जो चाहिए ले लो?चोर ने तुरंत लेखक के पांव में गिरकर माफी मांगी और कहा महोदय आप धन्य है आपने मेरी आँखे खोल दी मेरे नाम से आपको इतना धन आ सकता है तो मै काम करके क्यो नही बना सकता मुझे आपके स्नेह ने राह दिखा दी अब मै कभी किसी के घर चोरी नही करूँगा। इतना कहते हुए कल्लू चोर अपने घर की ओर चला।घर आकर उसने अपने सारे बुरे कार्य छोड दिया और मेहनत करने लगा।कुछ समय पश्चात उसे अच्छी कमाई होने लगी और वह भी तरक्की करने लगा।
लेखक ने उसे आत्मज्ञान की अनुभूति करायी ये सब कुछ तो हुआ अन्जाने में कहने का तात्पर्य हम सभी को नित कुछ न कुछ ज्ञान अवश्य मिलता है पर उस ज्ञान को हमलोग पकड नही पाते जो पकड लेते है वो आगे निकल जाते है आज आत्मज्ञान की कमी प्रायः लोगो मे नजर आती है और आत्मचिंतन-मंथन से लोग दूर भागते नजर आते है। मर्यादाविहीन होते लोग कल्लू चोर बन जाते है जिन्हें लेखो प्रलेखो और लेखको से कोई वास्ता नही वो तो विलासिता को ही अपना भगवान बना बैठे है । लगातार पढ़ने की परम्परा विलुप्त होती जा रही किताबो की जगह गूगल और मोबाइल ने ले रखी है। किताबो के शब्द मौन होने लगे है जो वास्तविक और परम्मरावादी और उत्साहवर्द्धक हैं।जो हमारी चेतना को जगाने के साथ अच्छे और सकारात्मक विचार को जगाते रहते थे।आज उदंड़ता अल्हड़ता और फूहड़ होते समाज के लिए अच्छी और भरोसे की किताब बस लाइब्रेरियों की शोभा मात्र रह गयी है।

“आशुतोष”

नाम।                   –  आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम –  आशुतोष
जन्मतिथि             –  30/101973
वर्तमान पता          – 113/77बी  
                              शास्त्रीनगर 
                              पटना  23 बिहार                  
कार्यक्षेत्र               –  जाॅब
शिक्षा                   –  ऑनर्स अर्थशास्त्र
मोबाइलव्हाट्स एप – 9852842667
प्रकाशन                 – नगण्य
सम्मान।                – नगण्य
अन्य उलब्धि          – कभ्प्यूटर आपरेटर
                                टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य   – सामाजिक जागृति

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।