मां अम्बे तू गौरी

मां अम्बे तू गौरी ,
तेरे ही रूप अनेक ,
तू तीनों लोको में प्रसिद्ध ,
सबकी इक्शा पूर्ण करने वाली ,
नव नामों से तू पुकारी जाती ,
प्रथम तू शील तपस्या से परिपूर्ण ,
शैलपुत्री से जानी जाती ,
दूसरी ब्रहा जी की स्वरूप प्राप्त ,
ब्रह्मचारिणी से प्रसिद्ध हुई ,
तीसरी तू चन्द्र घंटा में स्थित ,
चंद्रघंटा से चरीचार्थ हुई ,
संसार जिनके उदर में स्थित हो ,
उस देवी के चौथे रूप कूष्माण्डा से जानी जाती ,
मां शक्ति से उत्पन्न , सनतकुमर के नाम से ,
पाचवी रूप को स्कंदमाता से प्रसिद्ध हुई ,
महर्षि कात्यायन के आश्रम से प्रकट हुई ,
मां के छठे रूप को कात्यायनी कहते है ,
सब दुष्टों को संहार करने वाली काल के रात्रि ,
मां के सातवें रूप को कालरात्रि कहते है ,
महान गौरवपूर्ण तपस्या द्वारा प्राप्त ,
मां के आठवीं रूप को महागौरी कहते है ,
तीनों लोको में सबको मोक्ष प्रदान करने वाली ,
मां के नवे रूप को सिद्धिदात्री के नाम से जानते हैं ,
नवरात्र में नौ रूपों के नाम से प्रसिद्ध ,
तेरे रूप तीनों लोको में प्रसिद्ध ,
तू मां संसार में महान ,
तू दुःख हरनी मां , तू सुख करनी ,
तेरे पूजन तेरे सारे जीवन का उद्धार होता ,
मां तू जग में महान ।

रूपेश कुमार 

छात्र एव युवा साहित्यकारजन्म – 10/05/1991शिक्षा – स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर)बी.एड (अध्ययनरत)( महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी बरेली यूपी)वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी !विभिन्न राष्ट्रिय पत्र पत्रिकाओ मे कविता,कहानी,गजल प्रकाशित !कुछ सहित्यिक संस्थान से सम्मान प्राप्त !चैनपुर,सीवान बिहार – 841203

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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