आग देशभक्ति वाली…

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ghanshyam sharma

आग देशभक्ति वाली…
आग देशभक्ति वाली, सीने में मेरे ज़िंदा है,
अब तक भी ना मिला लक्ष्य, ये सोच सभी शर्मिंदा हैं,
आग देशभक्ति वाली..
आग देशभक्ति वाली, सीने में मेरे ज़िंदा है,
अब तक भी ना मिला लक्ष्य, ये सोच सभी शर्मिंदा हैं।।

मन को कर ले सख्त…
मन को कर ले सख्त, रक्त आहुति तुझको देनी है,
भारत का तू भक्त, वक्त से छीन के खुशियांँ लेनी हैं।
बरसों से जो चिथड़े वाला, भूखा-भूखा ज़िंदा है,
अब तक भी ना मिला लक्ष्य, ये सोच सभी शर्मिंदा हैं…

देखा-देखी होड़ा-होड़ी…
देखा-देखी होड़ा-होड़ी, छोड़ के निज अंतर झाँको,
नए-नए अब यंत्र बनें, बस मंत्र यही सब तुम हाँको,
धरती पर भी मेड इन इंडिया, आसमान में परिंदा है।
अब तक भी ना मिला लक्ष्य, ये सोच सभी शर्मिंदा हैं…

विश्व-गुरु हो जा तू शुरू…
विश्व-गुरु हो जा तू शुरू, वही मान अब पाने को,
कसो कमर भारत के बच्चों, दुनिया पर छा जाने को,
ओलिम्पिक  में नीचे सबसे, अपने आप में निंदा है।
अब तक भी ना मिला लक्ष्य, ये सोच सभी शर्मिंदा हैं…

ऊपर वाला…
ऊपर वाला, ऊपर वालों को ही देता माया है,
नीचे वालों ज़ोर लगा लो, वक्त तुम्हारा आया है,
खुशियांँ सबको, चाहे कोई कितना नीचे पिंदा है।
अब तक भी ना मिला लक्ष्य, ये सोच सभी शर्मिंदा हैं…

आग देशभक्ति वाली सीने में मेरे ज़िंदा है ।
अब तक भी ना मिला लक्ष्य, ये सोच सभी शर्मिंदा हैं ।
आग देशभक्ति वाली सीने में मेरे ज़िंदा है,
…सीने में मेरे…ज़िंदा..है..

#घनश्याम शर्मा*

परिचय-
नाम : घनश्याम शर्मा
पिताजी: – श्री श्रीराम शर्मा
माताजी: –  ‘माँ’ श्रीमती सुरेश देवी
निवास स्थान :- पिलानी, राजस्थान।
शिक्षा – एम.ए.(हिंदी, समाज शास्त्र , शिक्षा), बी.एड., एमबीए(ए), आरएससीआईटी, सीटैट, रीट,
एचटैट टीजीटी(दो बार), एचटैट पीजीटी(दो बार), यूजीसी नेट-जेआरएफ(दो बार)
रुचि: कविताएँ- कहानियाँ लिखना, संगीत सुनना, क्रिकेट, बैडमिंटन खेलना।
पता – भुवनेश्वर(ओडिशा)
प्रकाशित पुस्तकें :  1. ‘किसलय’ -2018
                            2. ‘मेरी रचना कोश’ -2019
                             3. ‘गुलदस्ता’ -2019
                             4. ‘काव्य-दर्पण’ -2019
  ( उपर्युक्त चार साझा-काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित) 
                              5.  ‘प्रतिश्रुति’ साझा कहानी-संग्रह मुद्रणालय में।

ओनलाइन प्रकाशन  :- kositimes.com  वेबसाइट पर  गीत  ” मैं गीतों की बस्ती का शहज़ादा…”  प्रकाशित।

संप्रति : केवि नं.- 4, भुवनेश्वर  में हिंदी स्नातकोत्तर शिक्षक पद पर कार्यरत।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।