नारी कभी संतुष्ट नहीं हो सकती 

sanjay
दोस्तों आज में रक बड़ा ही उलझा हुआ विषय लिया है जिस पैट में एक लेख लिखे जा रहा हूँ / जिसके बारे में स्वंय वो भी नहीं जानती, जिस पर में लेख लिख रहा हूँ / वो विषय है क्या नारी कभी संतुष्ट हो सकती है ? अभी तो देखा गया है की ये कही पर भी संभव नहीं हुआ / इसके लिए एक छोटा हम उदहारण देकर बताने की कोशिस करता हूँ / शायद इस विषय को में सही रूप से समझ सकूँ और आप सभी लोगो को समझा सकू / बात एक शहर के बाज़ार की है जहाँ पर एक दूकान खुली , उसके बोर्ड पर  लिखा था की “यहाँ आप पतियों को ख़रीद सकती है ?
इस बोर्ड को पड़कर औरतों का एक हुजूम वहां जमा होने लगा, सभी दूकान में दाख़िल होने के लिए बेचैन  होने लगे ,  और देखते देखते  वहां पर एक  लंबी क़तारें महिलाओ की लगनी शुरू हो गई / जैसे ही महिलाओ ने दुकान में प्रवेश किया तो एक बोर्ड और वहां पर लगा था और उस पर कुछ शर्त आदि लिखी हुई थी / जिसको सभी लोगो को वो मान्य होंगी /
दूकान के मैंन दरवाज़े पर लिखा था “पति ख़रीदने के लिए नीचे लिखी हुई शर्ते लागू” …..
इस दूकान में कोई भी औरत सिर्फ एक मर्तबा दाख़िल होसकती है../ दूकान की 6 मंज़िले है,और हर मंजिल पर पतियों के प्रकार के बारे में लिखा है /
ख़रीदार औरत किसी भी मंजिल से अपना पति चुन सकती है / लेकिन एक बार ऊपर जाने के बाद दोबारा नीचे नहीं आ सकती, सिवाए बाहर जाने के../एक खुबसूरत लड़की को दूकान में दाख़िल होने का मौक़ा मिला..  पहली मंजिल के दरवाज़े पे लिखा था “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है और नेक है” / लड़की आगे बढ़ी दुसरे मंजिल पे लिखा था “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है और साथ ही नेक है तथा बच्चों को पसंद करते है” / लड़की फिर आगे बढ़ी तीसरी मंजिल के दरवाजे पे लिखा था, “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है,नेक  है और खुबसूरत भी है”  ये पढ़कर लड़की कुछ देर केलिए रुक गयी मगर, ये सोचकर के चलो ऊपर की मंजिल पर जाकर देखते है/
आगे बढ़ी.. चौथी मंजिल के दरवाज़े पे लिखा था “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है, नेक है, खुबसूरत भी है और घर के कामों में मदद भी करते है” / ये पढ़कर लड़की को चक्कर आने लगे और सोचने लगी “क्या ऐसे भी मर्द इस दुनिया में होते है ? यही से एक पती ख़रीद लेती हूँ” लेकिन दिल ना माना तो एक और मंजिल ऊपर चली गयी /  पांचवी मंजिल पर लिखा था “इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है,नेक है और खुबसूरत है, घर के कामों में मदद करते है और अपनी बीवियों से प्यार करते है” / अब इसकी अक़ल जवाब देने लगी ,वो सोचने लगी इससे बेहतर मर्द और क्या भला हो सकता है? मगर हर बार की तरह  फिर उसका दिल नहीं माना और आखरी मंजिल के तरफ क़दम बढाने लगी / आखरी मंजिल के दरवाज़े पे लिखा था “आप इस मंजिल पे आने वाली  ५५३८ वीं औरत है / इस मंजिल पर कोई भी पति नहीं है, ये मंजिल सिर्फ इसलिए बनाई गयी ताकि इस बात का सुबूत दिया जा सके की नारी को पूर्णत संतुष्ट करना ना मुमकिन है / हमारे स्टोर पर आने का शुक्रिया सीढियाँ बाहर की तरफ जाती है / अब आप सुकून से अपने घर जा सकती है / जिसने इस श्रष्टि की रचना की वो भी नारियो को कभी भी संतुष्ट नहीं कर सका / वैसे तो नारी पूज्य्नीय है इसलिए हिंदुस्तान में नारी को बहुत ही आदर से देखा जाता है / घर की वो मर्यादा है साथ ही घरो की शान, आन और बान है / ये हम और आप देवी भी कहते है /

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

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