माँ

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diptesh tiwari
मेरी माँ गीत है , प्यार संसार की,
मेरी माँ मुझको मिली है, फूल फुलवार की,
मेरी माँ हैं गीत हैं ,प्यार संसार की,
मेरी माँ मुझको मिली है,फूल फुलवार की,
पानी में भी खिले वो, मैथिल कमल सरोज है।
दीप की बाती वही, मुख मेरी वो ओज है।।
मेरी  माँ  गीत  है  प्यार  संसार  की ,।
मेरी माँ मुझको मिली है,फूल फुलवार की,।।
रात  की  चांदनी  भी, अब  मुझे  निर्मोह  है,।
मेरी मां मुझको तो केवल तेरी आँचल से मोह है,।।
मेरी  माँ  गीत  है , प्यार  संसार  की,।
मेरी माँ मुझको मिली है फूल फुलवार की,।।
नाव के थपेड़ों में लिखा ,गीत पतवार की,
रो रहा वो खुदा भी ,दे उसे सूरत प्यार की,
मेरी माँ मुझको मिली है फूल फुलवार की
मेरी  माँ  गीत  है  , प्यार संसार की,
होऊं जब मैं मुसीबत में, तो निभाए किरदार यार की,।
माँ  छंद  में भी  समाई ,तू तो  वयाकरण  प्यार  की,।।
मेरी  माँ  मुझको  मिली  है  ,फूल  फुलवार  की,।
मेरी  माँ  गीत है  एक , प्यार सांसर की,।।
# ️दिप्तेश तिवारी
परिचय
नाम:-दिप्तेश तिवारी
पिता :-श्री मिथिला प्रसाद तिवारी(पुलिस ऑफिसर)
माता:-श्रीमती कमला तिवारी (गृहणी)
शिक्षा दीक्षा:-अध्यनरत्न 12बी ,स्कूल:-मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल रीवा 
परमानेंट निवास:-सतना (म.प्र)
जन्म स्थल:-अरगट 
प्रकाशित रचनाए:-देश बनाएं,मैं पायल घुँगुरु की रस तान,हैवानियत,यारी,सहमी सी बिटिया,दोस्त,भारत की पहचान आदि।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।