मैं खुद जवाब हूँ हर सवाल का मुझको अफवाहों से डराता है क्या मुझको प्यास है सात समंदर की मुझको फिर बूँद-बूँद पिलाता है क्या मैंने आसमाँ को बाँहों में जकड़ रखा है तू मुझको ख़्वामखाह ज़मीं पे गिराता है क्या मैंने कितने होंठों को हुश्न के काबिल बना दिया […]
काव्यभाषा
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