पत्तों सी होती है, रिश्तों की उम्र…! आज हरे……कल सूखे। क्यों न हम, जड़ों से सीखें,रिश्ते निभाना..!! जो दिल की, बात सुनते है। उन्ही के ह्रदय में, रिश्ते वास्ते है। रिश्ते क्या होते है, ये तो वो ही, समझते है। जिनके अपने होते है।। जमाना चाहे, कुछ भी कहे, उसे […]
काव्यभाषा
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