गुलाबी रंग फूलों में। सजा है संग शूलो में। सजे ये ओस के मोती। धरा अहसास के बोती। कहें ऋतु फाग होली की। हवाएँ गीत बोली की। दहकना है पलाशों का। गया मौसम हताशों का। प्रकृति सौगात देती हैं। धरा उपहार लेती है। तभी तो रीति होली हो। सही मन […]
काव्यभाषा
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