पाय  लागु  कहते  हैं,  डांट – बाट सहते हैं दया  से  करोगे    मत  , आप  पछताओगे। शिशु को  सँवारते हैं, बालों को  निहारते हैं नाख पोंछ  दृश्य  देख  , आप  बहजाओगे। आपसे वे लेते सेल्फी,मुँह में लगा के कुल्फी ठण्ड  करवाने  से  ही, आग  भूल  पाओगे। नोट पांच सौ […]

वो मेरे घर पे आते नहीं अपने घर पे बुलाते नहीं परीशां खूब है वो भी वजह क्या है बताते नहीं बातें हुई ज़माने भर की पर निगाहों को उठाते नहीं कैसे होगी मंज़िल आसान हया का पर्दा भी गिराते नहीं कैसे मालूम होगी रज़ामंदी इश्क़ अपना तो जताते नहीं […]

ऐ नौकरी मेरी नौकरी तू है कहां तू है किधर तुझे ढूंढती मेरी नजर।। जो मिल गई तो संवर गया, गर न मिली तो बिखर गया। तू है तो सब कुछ पास है, तू जो गई तो सब गया। बिन नौकरी कीमत नही , कोई कितना भी पढ़ लिख गया। […]

बैसाख का महीना ग्रीष्म ऋतु का आगमन सूरज की गुनगुनाती धूप खिड़कियों से झांकती इतराती,इठलाती संदली सी धूप फिर चिलचिलाती तपती दुपहरी गर्मी की तपिस से तपता वदन कठिन परिश्रम करते मजदूर लोग टप-टप टपके तन से पसीना अनवरत कार्य करते देखते है तो मन अनायस ही कुछ कहने को […]

जानिए स्वयं को स्वयं से मानिए स्वयं को स्वयं से आत्मस्वरूप को निहारिए मैं कौन हूँ , यह जानिए क्या स्वरूप है मेरा? इस देह से क्या नाता है मेरा? देह तो पंचतत्व है,मिटनी है आत्मा ज्योतिबिंदू है,टिकनी है पर आत्मा को तराशना होगा शांति,धैर्य, सेवा से तापना होगा आत्मा […]

श्रमिक के श्रम का कब करोगे सम्मान जबकि उनके परिश्रम पर ही टिका है देश का मान। कल-कारखाने हो या हो खेत खलिहान श्रमिक के श्रम बिन सब बंद और बंजर समान। सडक रेल या हवाई सफर श्रम के बिन सब लचर श्रमिक की तो बात निराली अपने श्रम से […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।