जला सूरत तस्वीर थी बदसूरत प्रशासन था मौन कैसी ये फितरत झुलस गए मासूम मां उसको निहार रही, हड्डी के ढांचों में ममता निढाल विलाप रही। आग बुझी इमारत की दिल की आग कौन बुझायेगा क्या सिर्फ मुआवजों से मरहम लग पायेगा। सुविधा विहीन इमारत पर कोचिंग का गोरख धंधा […]
काव्यभाषा
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