चद्र ग्रहण को देखकर, मन में उठे विचार। कोई अछूता न बचा, समय चक्र की मार।। चंदा,सूरज को ग्रहण, देता प्राकृत चक्र। इसी भाँति इंसान को, समय सताता वक्र।। धीरज से कटता ग्रहण, होय समय बदलाव। मानुष मन धीरज रखो, ईश्वर संग लगाव।। सृष्टि सौर संयोग में, मत बन बाधा […]
काव्यभाषा
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