नित्य नियम से मदिरा पान कराये, आजकल तो सच्चा मित्र वही है | दुःख दर्द में जो दारु पिलाये, सच्चा मित्र तो आज वही है | पिला कर जो नाली से निकाले , उस जैसा कोई मित्र नहीं है | मधुशाला का नित्य निमन्त्रण, जो देता है अच्छा मित्र वही […]
काव्यभाषा
काव्यभाषा
