जैन धर्म के श्रावक सुन लो, गुरु विद्यासागर जी की एक बात। सत्य अहिंसा से बढ़कर कुछ नही होता है धर्म ।। जो भी श्रावक धारण करते, सत्य अहिंसा के पथ को। मोक्ष का मार्ग उन्हें दिखता, इस पथ पर चलते हुये। सत्य अहिंसा से बढ़कर, और कोई धर्म नही। […]
काव्यभाषा
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