मां अम्बे तू गौरी , तेरे ही रूप अनेक , तू तीनों लोको में प्रसिद्ध , सबकी इक्शा पूर्ण करने वाली , नव नामों से तू पुकारी जाती , प्रथम तू शील तपस्या से परिपूर्ण , शैलपुत्री से जानी जाती , दूसरी ब्रहा जी की स्वरूप प्राप्त , ब्रह्मचारिणी से […]
काव्यभाषा
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