चार करोड़ बेरोजगारी बढ़ी अर्थ व्यवस्था ओंधे मुहं गिरी बाजार में भी ग्राहक नही उपलब्धि लायक बात नही किसान आंदोलन कर रहा फ़सल के दाम को तरस रहा बहु बेटियां सुरक्षित नही बिना घूस कुछ मुमकिन नही वे गाल बजाने में व्यस्त है आम जनता बेचारी त्रस्त है भयमुक्त समाज […]
