महबूब मेरा छेड़े दिल के तार रंगों से तूं खेले करे सोंलह श्रृंगार रोते को हंसाए तूं अंधकारों को चीर सुबह का प्रकाश लाए तूं, तूं ही नदियों में सुर ताल छेड़े,समुद्र में तबला बजाए तूं गुरुद्वारों से निकले वीणा की वानी मंदिरों में घंटियाँ बजवाए तूं लहरों से उठती […]
