जाने-अनजाने ही जुड़ गई तुमसे मेरी हर अभिलाषा तुम्हें समर्पित मेरा जीवन अर्पण तुमको ही हर आशा मन-मंदिर में जो स्थापित है रत्न-जड़ित वो मूर्ति हो मेरे बहुरंगी स्वप्नों की तुम ही इच्छित पूर्ति हो जब भी घोर निराशा छाए देती तुम्हीं मुझे दिलासा तुम्हें समर्पित मेरा जीवन अर्पण तुमको […]
