एक मात्र शाश्वत सत्य यही, शिव के त्रिनेत्र का रहस्य यही, चंडी का नैसर्गिक रौद्र नृत्य यही, कृष्णा सा श्यामला, राधा सा शस्य यही। तो क्यों न मीरा सा इसका भी विषपान किया जाए। ये अनादि है, ये अनंत है, ये गजानन का त्रिशूली दंत है, यही है गोचर, यही अगोचर, यही तीनों […]
