एक कमजोर तिनका तैर रहा था उदंड लहरों के थपेड़ों में । लहरें बार- बार आतीं संपूर्ण वेग से डुबो देना चाहती तिनके को । तैरता हुआ तिनका स्वयं भी समझ न पा रहा था आखिर क्यों वह इन प्रचंड लहरों में डूब नहीं रहा है? लहरों का प्रहार तिनके […]
अनेक राह हैं…. लंबी-लंबी सड़कें, उबड़-खाबड़ वीथिकाएं, कच्चे-पक्के रास्ते. बर्फ वाले पहाड़, गहरी तलहटियां, चाय-बागानों की ढलान. उजड़े-बियाबान, घने-वन. हर जगह है मौजूद, इस दुनिया का वजूद. फिर भी,बन न सकी एकछोटी,कच्ची-पक्की राह तुम्हारे और मेरे दरम्यान,, जिसपर चलकर हम आ सके इतने करीब, कि, ‘स्व’ समाहित हो, […]
