वर्षा है सयानी रानी मन की दीवानी मानी पावस ऋतु की प्रीत ….रीत ही निभाइये।। दादुर नँगारे बाजे कलापी सुनृत्य साजे चातक पपीहा वाणी …गीत ही सुनाइये।। खेत में किसान घूमें धान पुरवाई झूमे बिटिया झुलन कहे झूला तो बनाइये।। सावन बिताय अब भादवे लगे है जब याद बृजराज आए […]
