धरती का सूरज आज से आसमान में जगमगाएगा यहीं रहा है और रहे हमेशा दिलों से कभी न जायेगा। एक एक भारतवासी में वह रहेंगे जिंदा मौत एक सच्चाई है सिर्फ तन से सांसे हुईं जुदा। आसमान में एक अभी था आज से दो ध्रुव तारे होंगे अमावस कभी काली […]

ज़िन्दगी है चार दिन की,जरा मुस्कुराइए, ख्वाबों के दायरे से हकीकत में आइए। ख्वाब होते हैं सुहाने,पलकें जब तक बन्द हैं, खुल जो गईं हैं आंखें तो फिर जाग जाइए। आपके आसपास जो हैं आपके अपने हैं सब, घावों पर उनके भी तो कभी मरहम लगाइए। खुशनसीबी तो आपकी चौखट […]

दिल के आइने में अपने जरा झाँककर देखो, चेहरा तुम्हें तुम्हारा ही नज़र आ जाएगा। मन को अपने ही तुम आँककर देखो, बैठाए हो जो पहरा, वो नज़र आ जाएगा। लालच का जो कुआँ अपने अन्दर बना रखा है, वो तो कभी भी शायद भर ही न पाए। ईर्ष्या, द्वेष, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।