न मन्दिर जरूरी है न मस्जिद जरूरी है न गिरजा जरूरी है न गुरुद्वारा जरूरी है परमात्म अनुभूति को आत्म शुद्धता जरूरी है आत्मा पर गर मैल हो तो ध्यान नही लगेगा आत्मा का परमात्मा से योग नही लगेगा पतित से पावन बनने को अभ्यास जरूरी है परमात्मा रहे सदा […]

सच्चे मन से करों दुआ परमात्मा सुन लेगा जो भी तुम चाहोगे वही वह कर देगा अपने लिए तो सभी मांगते दुसरो के लिए मांगकर देखो दुआ कबूल हो जायेगी एक बार दुआ करके तो देखो परोपकार है सच्ची सेवा सुख भी मिलता इससे अपार इंसानियत की कसौटी पर कभी […]

करनकरावनहार है प्रभु तू साक्षी बनकर देख सब कुछ मिल जायेगा बस अपना बनाकर देख मांगने की दरकार नही जो चाहिए वही मिलेगा पिता है वह तुम्हारा बस तू बेटा बनकर देख सारे सुखो का सागर वो शांति का अधिनायक वो विकार दूर कर देगा सारे पवित्रता अपनाकर देख वह […]

आधुनिकता की होड़ मे लोक परम्परा बिसर गई परमात्म चिंतन छोड़ कर व्यर्थ सोच मे उलझ गई दुसरो की सोचते सोचते पूरी जिंदगी गुजर गई किया होता गर स्व चिंतन खिला होता तन और मन जो चले परमात्म मार्ग पर उनकी जिंदगी संवर गई।     #गोपाल नारसन परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ […]

कराता है वही जो पिता है हमारा सिखाता है वही जो पिता है हमारा वास्तव मे हम कठपुतली है उसकी नचाता है वही जो पिता है हमारा सफलता उसकी असफलता उसकी रिमोट कन्ट्रोलर वो जो पिता है हमारा गुमान कैसा फिर अपने मैं पन का सुप्रीम तो वही जो पिता […]

कोना फटा पोस्टकार्ड था अशुभ सूचना संकेत डाकिया जिस घर भी लाता शोकमग्न होता हरेक अमीर गरीब सबके क्रिया क्लाप थे एक दुख की उस घड़ी में विरक्ति भाव आते अनेक आधुनिकता के युग मे आज मृत्यु भी स्टेट्स सिम्बल बन गई श्रद्धांजलि भी होर्डिंग मे सज गई दिवंगत की […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।