पिछले वर्षों ,में  पुराने 500 व  1000  की करेंसी नोट लीगल टेंडर नहीं होने के बाद  नए 500 व् 2000 के करेंसी नोट के चलन से भ्रष्टाचार  ,नकली करेंसी रोकने आदि हेतु उपायों को चलन में लाया गया  था  किन्तु  इसमें कुछ व्यवहारिक परेशानी का सामना आम लोगो से लेकर खास लोगो  करना पड़ा था  […]

धान रोपने वाले मजदूरों को समर्पित पग दलदल में मन उलझन में कमर बनी कमान वे रोपते धान। रंग बिरंगी पन्नी ओढ़े आते है सब दौड़े-दौड़े बस मेहनत ही भगवान वे रोपते धान !! बिच्छू सांप है संगी-साथी न वृष्टि न धूप सताती न आंधी और तूफान वे रोपते धान […]

मै नारी हूँ, ये अपराध मेरा तो नहीं हाँ मै नारी हूँ ! तुम्हारी लेखनी ने संस्कृति के उत्कर्ष तक मुझे पहुंचा दिया धरती का प्राणी ही नहीं देवी भी मुझे बना दिया किन्तु, तुमने मुझे बना दिया पातळ की छाती को विदीर्ण करनेवाली एक चीत्कार प्रकृति-पटी पर उमड़ती कोसी […]

घायल जिस्म में जान अब भी बाकी है, कहता है पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है। बेशक आज कमज़ोर है घायल है मगर खुदसे लड़ने को  राज़ी है, बहुत तडपा है ज़िन्दगी में आगे और तड़पना पड़े तो कोई गम नहीं के पाना है जो मुकाम वो अभी […]

विरद श्याम प्यारे निभाते नहीं क्यों ? पुकारें स्वजन किन्तु आते नहीं क्यों ?   बढ़ाते रहे  चीर  हो  द्रौपदी  की, यहाँ रोज़ ही नारियाँ लुट रही हैं। बिना लाज के मारते भ्रूण-कन्या, बिना बात गायें यहाँ कट रही हैं।   तुम्हें गाय-बछड़े हमेशा से प्यारे, उन्हें मौत से आ […]

शिव ने शक का सर्प ले, किया सहज विश्वास। कण्ठ सजाया,धन्यता करे सर्प आभास। द्वैत तजें,अद्वैत वर, तो रखिए विश्वास। शिव-संदेश न भूलिए, मिटे तभी संत्रास॥ नारी पर श्रद्धा रखें, वही जीवनाधार। नर पर हो विश्वास तो, जीवन सुख-आगार॥ तीन मेखला तीन गुण, सत्-शिव-सुंदर देख। सत्-चित्-आनंद साध्य तब, धर्म-मर्म कर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।