किसान आंदोलन के नाम पर अराजक तत्वों ने गणतंत्र दिवस पर गणतंत्र की संप्रभुत्ता का अपमान करने का कुकर्म किया। कुठिंत ‘कलंक कथा’ देश को पीढियों तक जूभकर, शर्मसार करते रहेंगी। आलम में दंगाईयों ने बेशर्मी से कई जगह पर पुलिसकर्मियों पर हमला और जमकर तांडव किया। प्रदर्शनकारी हाथ में […]

आजादी के बाद जब 1950 में संघ लोक सेवा आयोग की पहली बार परीक्षा हुई तो उसमें 3647 अभ्यर्थी शामिल हुए थे जिनमें से 240 उत्तीर्ण हुए. 1960 में 10000 बैठे थे, 1970 में 11710 बैठे थे और 1979 में यह संख्या बढ़कर एक लाख से ऊपर हो गई. इस […]

प्रिय साथियों, महात्मा गाँधी संस्थान के सृजनात्मक लेखन एवं प्रकाशन विभाग द्वारा १९७८ से त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘वसंत’ (ISSN- 1694-4100) का हिंदी में निरंतर प्रकाशन होता आ रहा है l श्री अभिमन्यु अनत जी इसके प्रथम संपादक थे l प्रवासी हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनका अप्रतिम योगदान अविस्मरणीय है […]

हमारी अनेकों पुण्यताओं को एक पाप भी कलुषित कर जाता है, कुछ ऐसा ही इंदौर शहर के साथ हुआ। देश में नंबर 1 आने के यश व कीर्ति को पूरे शहर ने अपनी जिम्मेदारी समझकर स्वीकार किया। स्वच्छता लोगों के व्यवहार में आने लगी। मानसिकता में यह परिवर्तन देश में […]

आज़ादी आंदोलन में नेताजी पराक्रम के प्रतीक थे –प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल वर्धा, 24 जनवरी 2021: महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने कहा है कि आज़ादी के आंदोलन में नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस का महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है। सन् 1857 से 1947 तक आज़ादी […]

देश में नित नये नियमों की बौछार हो रही है। कानून पर कानून बनाये जा रहे हैं। कहीं यातायात नियमों में आशातीत परिवर्तन तो कहीं टैक्सों में बेताहाशा वृध्दि। दलगत राजनीति की मजबूती हेतु सत्ताधारी दलों व्दारा खजाने को लुटाने की होड़ लगी हुआ है। चंद स्थानों को समूचे क्षेत्र […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।