श्री सम्मेदशिखर जी को पर्यटन स्थल घोषित करने के विरोध में बुन्देली भाषा में कविता। भाव सहित एक बार नमैं तो, फल में मुक्ति-रमा लो। सम्मेद शिखर है जान जैन की, मिलकैं ई खों बचा लो।। एन जोर से चीख-चीख कें कै रव पर्वतराज। खूब गुलामी के दिन देखे पर, […]

उठो वत्स! भोर से ही जिंदगी का बोझ ढोना किसान होने की पहली शर्त है धान उगा प्राण उगा मुस्कान उगी पहचान उगी और उग रही उम्मीद की किरण सुबह सुबह हमारे छोटे हो रहे खेत से….! गोलेन्द्र पटेल, ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश परिचय: नाम : गोलेन्द्र पटेल जन्म […]

डाॅ. पगारे और डाॅ. दीक्षित को विशिष्ट साहित्यिक योगदान सम्मान इंदौर । वरिष्ठ शिक्षक और लेखक डाॅ. एस.एन. तिवारी की स्मृति में इस वर्ष (2022) आठ रचनाकारों को सम्मानित किया जाएगा। सम्मान समारोह रविवार 25 दिसंबर को अपरान्ह 4.15 बजे मध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति, इन्दौर के शिवाजी सभागार में […]

क्या कल्चर है नाइट ? ज़्यादा ग़लत, कम राइट, चकाचौंध से धुंधली हो रही इन आँखों की लाइट । क्या…. पी के झूम रहे हैं, रात में घूम रहे हैं, सिगरेटों के उड़ते धुएँ को ले के चूम रहे हैं। बिना डोर के उड़ा रहे हैं देखो अपनी काइट। क्या….. […]

लघुकथा संग्रह ‘खिड़की’ लोकर्पित इन्दौर। लेखिका यशोधरा भटनागर के लघुकथा संग्रह ’खिड़की’ का विमोचन मातृभाषा उन्नयन संस्थान व संस्मय द्वारा शनिवार दोपहर श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति में हुआ। पुस्तक का प्रकाशन संस्मय प्रकाशन दिल्ली के द्वारा किया गया। आयोजन में मुख्य अतिथि डॉ. विकास दवे ने रचनाकारों का आह्वान […]

मित्र शब्द है जाना पहचाना सा, दिल के क़रीब कोई अपना सा, जिससे नहीं हो कोई भी सम्बन्ध, पर हो दिल के गहरे बंधन तो वह है मित्र.. जो बिन कहे सब समझ जाएं जिसे देख दर्द भी सिमट जाए, जिसे देखकर ही आ जाये सुकून और सब तनाव हो […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।