👧🏻मत मार मुझे जीवन दे माँ, मुझको भी दुनिया देखने दे, मैं तेरे दिल का टुकड़ा हूं, फिर क्यों मुझ पर ही वार करें। मत मार मुझे … 👧🏻 तू भी तो एक नारी है माँ, फिर क्यों नारी का अपमान करे, तू दिल है मैं तेरी धड़कन, फिर क्यों […]

जीवन की आपाधापी में, हम कुछ ऐसे व्यस्त हुए। फिकर रही ना स्वास्थ्य की, हम कुछ ऐसे मस्त हुए। क्या है अच्छा ,क्या है बुरा, इसकी परख ना हमने की। बांधकर पट्टी आंखों पर, भेड़ चाल है हमने चली। सारे एशो आराम की खातिर, खूब कमाई हमने की। तन तो […]

सारे देश में छाईं खुशियां, जन जन हुआ है भाव विभोर। घर-घर में बनी सेवइयां, होने लगा गीतों का शोर । कर लो याद जरा उनकी भी, जो करते हैं रक्षा सरहद की। हर पल जान हथेली पर रखकर, करते हैं रक्षा मां बहनों की। त्यौहारों पर जब हम सब, […]

पृथ्वी से सीखो, धीरज रखना सुख दुःख सारे हंसकर सहना। अम्बर से सीखो ,सबको ढकना, अपना पराया कभी ना करना। नदियों से सीखो,हर पल चलना, थक हार कर कभी ना रुकना। पर्वत से सीखो,सिर उठा कर जीना, दुष्टों के आगे कभी मत झुकना। चींटी से सीखो ,मेहनत करना, जीवन में […]

बोझ ना समझो बुजुर्गो को तुम, बुजुर्गों से ही है वजूद तुम्हारा। बुजुर्ग ना होते तो तुम कैसे होते, नामों निशान ना तुम्हारा होता। रूखा सूखा खुद ही खा कर, अच्छा भोजन तुम्हे खिलाया। कितनी रातें खुद ना सोए, लोरी गा कर तुम्हे सुलाया। उंगली पकड़कर चलना सिखाकर, अच्छे बुरे […]

शर्मसार हुई मानवता,ये कैसा कलयुग आया है, बेटियों पर मंडरा रहा ,हरपल डर का साया है। जब ,जहां, जैसे चाहा,बेटियों संग खिलवाड़ किया, करके बेआबरू उनको,इंसानियत को शर्मसार किया। कभी आपसी रंजिश में और कभी यूं ही दिल्लगी में, करके निर्वस्त्र मासूमों को, मिलकर दुष्टों ने नोंच लिया। कभी खेतों […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।