एक बार फिर इसी सप्ताह विश्व हिंदी दिवस का आगाज होने जा रहा है। वर्ष 2006 से प्रत्येक वर्ष दस जनवरी को भारत के विभिन्न दूतावासों और केंद्रीय सरकार के कार्यालयों आदि में विश्व हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है। विभिन्न हिंदी सेवी संस्थाएँ भी इस दिन हिंदी के […]

यह सत्य है कि राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी सदैव ही सियासत की रूप रेखा को नए रूप-रंग में गढ़ने का प्रयास करते हैं। ऐसा इसलिए कि प्रत्येक राजनेता अपने सियासी समीकरण को अपने हित के अनुसार पूरी तरह से ढ़ालने का प्रयास करते हैं जिसमें प्रत्येक प्रकार के सियासी […]

जैसे किसी गन्ने को चरखी में से चार बार गुजारने के बाद उसकी हालत होती है, या किसी भी पतरे की अलमारी को गोदरेज की अलमारी कहने की तर्ज पर पानी की हर बोतल को बिसलरी कहने वाले किसी व्यक्ति द्वारा पूरी बोतल गटकने के बाद उसे मरोड़ मरोड़ कर […]

कितने ही कड़वे अनुभव देकर साल 2020 बीत गया… इसके शुरुआती कुछ महीनों को छोड़ दें तो लगभग पूरा साल ही भय, असमंजस और आशंकाओं से भरा रहा… जिंदगी जैसे ठहर सी गई… कामकाज ठप, आवाजाही बंद और सब अपने अपने घरों में कैद… हर कोई बेरोजगारी, पलायन, बीमारी, अकेलेपन, […]

कृषकों, मजदूरों और आमजनों की समस्याओं से अच्छी तरह वाकिफ आम आदमी की तरह सहज, सरल-शैली, व्यक्तित्व और जन-रागात्मकता से युक्त ठेठ देशी अंदाज में अपनी बात रखने वाले गौरीशंकर बिसेन का बचपन से ही गांव की माटी व शहरों की गलियों से गहरा नाता रहा। शोषित, वंचित और पीड़ितों […]

पूरे विश्व में एक भारी संकट है जिसे कोरोना अथवा कोविड 19 के नाम से जाना जाता है। जिससे पूरा विश्व त्रस्त है। दुनिया के सभी देश इस प्राण घातक बीमारी से बाहर निकलने के लिए पूरी तरह से संघर्ष कर रहे हैं। पूरे विश्व की आर्थिक स्थिति पूरी तरह […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।