2

सुनो न मेरी प्यारी माँ, मुझे दूर न तुझसे जाना। कितना प्यारा था वो बचपन, जब नींद को गोद और सिर पर हाथ मिल जाता था, सब कुछ भुलाकर सीने से तेरे लग जाता था, माँ आगे बढ़ने की है चाहत पर, मुझे दूर न तुझसे जाना, माँ तूने दिया […]

विधा- हाइकु… घर से चला अपनों की चाह में मुसाफिर हूँ। निकल चला सपनों की चाह में मुसाफिर हूँ। चल पड़ा हूँ घर से भटकता दर-बदर। तलाशता हूँ यहाँ से वहाँ तुम्हें मुसाफिर हूँ। इस कदर चलता रहता हूँ दर-बदर। धीरे-धीरे ही चलता रहता हूँ ये मेरा काम। न मेरा […]

बाइस अगस्त सत्रह का दिन, सखी ऐतिहासिक व नारीत्व का रक्षक हो गया। पिसती हुई एक आबादी की जिन्दगी सँवर गई। पुरातन पुरुषवादी संकीर्ण एक सोच से आज नारी मुक्त हो गई। ईद का त्योहार आज सब हैं मना रहीं। उनके संग हम भी दिवाली मना रहे। नारी तो है […]

2

जब तुम कहते हो मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मुझे लगता है मेरा ख्याल करते हो। जब भी मेरी कमी महसूस करते हो, मुझे लगता है मेरा ख्याल करते हो। जब कभी यूं ही मेरा हाथ चुपके से, थामकर हल्के से दबा लेते हो मुझे लगता है मेरा ख्याल करते […]

कितने भी हों हालात बुरे,फिर भी इज़्जत से जी सकता, सम्मान मिले गर लोगों से,तो चाक ज़िगर भी सी सकता। अपमानित होकर जीना भी, जीना है इस दुनिया में, खुद्दारी जिसके रक्त में हो, अपमान का घूंट न पी सकता॥                     […]

अथाह समन्दर, मैं बूँद छोटी, अपने वजूद को कैसे बचाती, स्वाति नक्षत्र की बूँद जैसे, सीप में गिरकर मोती बन पाती ? ना चाहा कभी समन्दर में गिरूंगी, सागर में मिल समंदर बनूँगी, काश गिरती किसी नदी ताल में, किसी प्यासे की प्यास बुझाती।             […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।