तुम आ गए,आ जाओ अब तो हनीप्रीत भी आ गई। तुम पर हिंसा के आरोप लगे हैं,उस पर भी लग रहे हैं। बड़े ही धीरे-धीरे सधे कदमों से आ रहे हो। हनीप्रीत जब साथ हो तो भला तेज कैसे चला जा सकता है। तुम्हारे आने की आहट और हनीप्रीत के […]

नफरतें दिल में ले के रखते हैं, लोग जाने ये कैसे मिलते हैंl  देखकर हमको लोग जलते हैं, गुनगुनाऊँ तो फूल खिलते हैंl  अब मुकम्मल न बात होती है, लोग टुकड़ों में बात करते हैंl  खार रस्ते पे मत बिछाओ तुम, नंगे पांवों से हम गुज़रते हैंl  वो नशा आज […]

लाठी लिए,अपने पथ पर चले, धोती लपेटे,बस आगे बढ़े सादगी थी जिनकी पहचान, अपने-आप को किया जिसने, देश को कुर्बानl अंग्रेंजों का किया,भारत से सफाया, एक लाठी का असर,पूरे भारत में था छाया गोल-सा चश्मा पहने, अंग्रेजों को खदेड़ा जिसने `बापू` कहता है पूरा जग जिनको, आज़ादी दिलाई भारत को […]

शब्दों में कैसे बयां करुं, एक सैनिक का दर्द परिवार से पहले देश के लिए निभाता फर्जl अपनों के लिए नहीं मौका, मिलता करने का अर्ज लेकिन,क्यूँ सैनिक ही पूरा करता देश के लिए कर्जl नेता क्यूँ नहीं होता,  देश का असली मर्द नेता चुनाव में ही  अनाथ के साथ सोता […]

धन्य जवान ये वीर भगत सिंह,जिसने स्व कुर्बान किया। हँसते-हँसते फाँसी चूमा, आजादी हित बलिदान कियाll स्वतंत्रता के हवन कुण्ड में अपनी आहुति देकर, इंकलाब के नारे का  `मनु`युवा दिलों में आह्वान कियाll   इंकलाब की गूँज उठी,तब हर दिल में बसा तिरंगा था। जब आजादी की लपटों से मौसम का रंग सुरंगा थाll भारत माँ भी धन्य हुई तब पहन के चुनर बलिदानी, जिस चुनर को भगत सिंह ने रंग बंसती रंगा थाll   युवाओं के दिल में मचलता जोश है भगत सिंह। इंकलाब जिंदाबाद का उद्घोष है भगत सिंहll गूँगे-बहरे कुशासन को जगाती बुलंद एक आवाज, जो अंग्रेजी आँधी में भी जलती रही,वो जोत है भगत सिंहll   सरफरोशी की तमन्ना दिल में लिए जो बढ़ चलाl आजादी की पुस्तकों में अमिट गाथा गढ़ चलाll मेरी कुर्बानी से जन्मेंगें सैकड़ों भगत सिंह कह- सौंपने स्वयं को बलिदानी तख्त पर चढ़ चलाll                                                  #मनोज कुमार […]

  बात-बात पर रुठना, अच्छी नहीं है बात रुठकर मुंह मोड़ना, है और भी बुरी बातl अपनत्व में मनमाफिक, नहीं होता कभी-कभी लेकिन अपनों को छोड़ना, नहीं है अच्छी बातl व्यर्थ का सोचना, गर छोड़ देंगे आप फिर अपनों से नहीं मिलेगा, कभी कोई सन्तापl स्वयं का स्वयं से, जब […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।