रह-ए-इश्क में कुछ तुम भी,अपने से पहल करना। तोहफे़ में मिले आँसू,तो हँस के गजल करना॥ फिर से बखुशी लौटे,वो बज़्म हिरासत में। रौनक में शमअ का भी,मंजूर दखल करना॥ वो बार उठाना मत,लम्हों का सफर लेकर। आए न जिसे ग़म को,रंगों की फसल करना॥ बहकर के बहलते हैं,अश्कों का […]

छोड़कर राहों में मुझको,जो गए तुम इस तरह… एक पल कटती नहीं ये,ज़िन्दगी की बात है। होंठ है खामोश मेरे ये कदम रुकते नहीं… तू नहीं,तेरे बिना ये मुफलिसी हालात है। राग है रंगीनियाँ,साज भी सरताज़ तुम… दिन भी है खामोश और खामोश-सी ये रात है। रोककर अपने कदम जो […]

वो कहते हैं कि औरत कभी हो नहीं सकती बच्ची, अरे वो तो महज एक जमीन है कच्ची। जिस पे जो चाहे,जब चाहे जोते हल,और चुक जाए तो दे दे अन्य किसी मेहनतकश को लीज पर, या उगाता जाए फसल पर फसल वो साठ की उम्र में भी पुरुष, तू […]

1

मोहब्ब्त तुमसे है शिकायत तुमसे है, लासानी-सी ज़िंदगानी तुमसे है। मेरे रब की इबादत तुमसे है, मेरे घर की बरक़त तुमसे हैl मेरी ज़िंदगी की उपमा तुमसे है, मेरी ज़िंदगी का अलंकार तुमसे हैl मेरी हिन्दी का छंद तुमसे है, मेरी उर्दू का नुक्ता तुमसे हैl तेरी मोहब्बत मेरे लम्हों […]

आज चल गया पता ये मुझको जनसंख्या वृद्धि बेकारी है, देश की फूहड़ आधी `जनता` ढोंगियों के चक्कर में नाकारी हैl `भीड़` बनी है मूरख जनता अंधकार की नगरी में, मूढ़ दोचकर `खलबट्टों` में व्यर्थालाप की घघरी मेंl रामपाल हो,हो आसाराम या राम रहीम के गुर्गे हों, या कह लो ये […]

मैंने एक शख्स देखा बड़ा ही भोला–भाला, वही आंख वही नाक वही नयन नक्श, मैंने वही देखा जो दिखाई दिया एक नेक इन्सान देखा।   अंदर झांककर देखा वो बड़ा ही भद्दा–सा शैतान था, जो हर किसी को धोखेबाज–फरेबी कहता था सिवाय अपने; मैंने अपने में वो शैतान देखा स्वार्थ देखा।   हैं हम महापापी चेहरे पे मुखौटा लगाकर रहते हैं, दूसरों को प्रवचन देते ढोंगीराम देखा ll                                                             […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।