सभ्यते नियति-अभिशप्त ग्रीष्म परितप्त, अर्द्घ-नग्न पर्वत को सुनहली मदिरा पिलाकर, आलिंगन में बाँधकर दिगम्बर क्यों बनाती हो? उसके शुष्क श्यामल व्यथित पल-पल गगन में लहराते कुन्तलों को, कुल्हाड़ियों से काट-काटकर क्यों अपने को सजाती हो? उसके हृदय के ज़़ज़्बाती शोणित को क्यों अपने पांवों का महावर बनाती हो? अपने उच्छिष्ट […]

हे माधव, कहाँ…हो आओ.. हे ..नाथ भूल चुके हैं पार्थ। कर्म ..की ..गीता कर्तव्य..से..रीता धर्म का आवाहन् नहीं ..रहा..पावन। जब…. कि , पाप ..का ..सूरज ..चढ़ा है, जयद्रथ ने चक्रव्यूह गढ़ा है महाभारत की पृष्ठभूमि तैयार है कुरुक्षेत्र.. में ..रण.. हुंकार … है। किन्तु …गांडीवधारी अर्जुन, मोह.. की ..माया ..से […]

1

यूँ तो हमारे जीवन में छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं,जिन्हें हम भूल भी जाते हैं, और यदा-कदा याद भी कर लेते हैं, लेकिन,कुछ हादसे ऐसे होते हैं, जो संस्मरण बनकर हमारी स्मृतियों में गहरे पैठ जाते हैं। मेरे जीवन के स्मृति पटलसे ऐसा ही एक संस्मरण..         […]

इस नफरत के दौर में मैं अब शराफत कहाँ से लाऊँ, हर मुनाफे की खातिर मैं अब मिलावट कहाँ से लाऊँ। कैसे संभलूँ इस बेकार और झूठी दुनिया में मैं यारों, इन नापाक अदाओं में मैं अपनी अदावत कहाँ से लाऊँ। इस फरेबी ज़माने में,मैं बचपन की शरारत कहाँ से […]

हमने तुमको याद किया, सारा जमाना भूल गए। इतना तुमको प्यार किया, खुद से निभाना भूल गए। तेरा ही इंतजार किया, साँसों का आना भूल गए। हाथ तेरा जो थाम लिया, अपना ठिकाना भूल गए। हमने तुमको याद किया, सारा जमाना भूल गए। इतना तुमको प्यार किया, खुद से निभाना […]

मत्तगयंद सवैया…… पावन-सा मन में रख केशव, श्वांस समाहित भक्तिन राधा। गावत प्रीत सुनीत सुकीर्तन, गीत अलापित भक्तिन राधा। रास रसायन राग रसादृत, श्याम सुभाषित भक्तिन राधा। हार गई  मनमोहन पै सब, सो अपराजित भक्तिन राधा॥                             […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।