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विजयानंद विजय उस दिन मेरी तबीयत ठीक नहीं थी।मगर काम ऐसा था कि उसी दिन जाना भी अत्यावश्यक व अपरिहार्य था।अनमने भाव से मित्र के साथ शाम छः बजे बस स्टैंड आया।राँची के लिए एक आखिरी बस थी।कंडक्टर केबिन में सीट दे रहा था।लेकिन जब हमने केबिन में बैठने से […]

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भागवत शामराव पाटील अब मुट्ठीभर बेईमानों को बेनकाब करनेवाली कालेकुबेरों के जाल से  लक्षमी को मुकत करनेवाली आठ नवंबर सोलाह की निशा मे मोदीजी ने गर्जना कर दी काल बनकर आयी कालेकुबेरों के लिए नोटब॔दी॥1॥   रजनी में कंचन-रजत की सहसा चमक बढ़ गई कालेकुबेर-बेईमानों के चेहरे से चमक उज़ड […]

यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक / लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं। अधूरा नर,वैसे बिन नारी। सूना घर ज्यों,बिन फुलवारी ।। न हो अधम तू,बस मिथ्या में। क्यों […]

श्रीमती माला महेंद्र सिंह, (एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी) आज एक पुरानी सहेली से बात हुई। बातो ही बातो में वो फूट फूट कर रोने लगी। मै आश्चर्यचकित थी।  हम महाविद्यालय में साथ ही थे, हमारा ग्रुप ऑक्सिजन गैंग के नाम से प्रसिद्ध था। हमने […]

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-प्रभु जोशी अंग्रेजों के शताब्दियों तक जर-खरीद गुलाम रहे भारत जैसे मुल्कों के बीच, वहां के मीडिया द्वारा बहुत कारगर युक्ति से यह मिथ्या-प्रचार लगातार किया जाता रहा है कि अंग्रेजी ही ‘विश्वभाषा‘ है और उसका कोई ‘विकल्प‘ नहीं है। लेकिन अब सबसे बड़ी विडम्बना यही होने जा रही है […]

यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक / लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं। काव्य भाषा में होते,वैसे तो कई रस। कानों में मिश्री घोले,क्यूँ ये निन्दा रस।। निंदक नियरे […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।