रश्मिरथी शैलेष लोढ़ा : गर्म धरती से हास्य की ठंडक तक डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ अतीत ने वर्तमान की आंखों में झांका और मुस्कुरा के कहा, जीवन तो मैंने जिया, अब तो सिर्फ दौड़ है जीवन कहाँ रहा ?? नवम्बर ८, १९६९ को जोधपुर की धरती पर पिता श्याम सिंह लोढ़ा और माता […]
जम्मू | डोगरी एवं हिंदी भाषा के युवा बाल साहित्यकार, लघुकथाकार, कथाकार, कवि, आलोचक,लेखक, अनुवादक, भाषाविद्, सांस्कृतिककर्मी एवं समाजसेवी यशपाल निर्मल को उनके साहित्यिक योगदान के लिए बीर भाषा हिन्दी साहित्यपीठ, मुरादावाद , उत्तर प्रदेश की ओर से ” साहित्य वाचस्पति” की मानद उपाधि से विभूषित किया गया है। इस […]
