स्वनाम धन्य है अमृतसर नानक की धरा, अमृत है भरा इक ऊंकार हर ज़ुबान पर रहे सेवा का व्रत सबने है लिया हिंदूस्तान की आज़ादी थी धर्म खेत -खलिहान, गली-मोहल्ला युवा–सा जोश, उम्र का नाम होश 1919 की बैसाखी ने रचा इतिहास पंज दरिया की धरा ख़ून से नहाई जलियांवाला […]
