मेरी नींद को दिक्कत न भजन से है, न अजान से है, मेरी नींद को दिक्कत पिटते जवान और मरते किसान से है। मेरी नींद को दिक्कत न मंदिर से है, न मस्जिद से है, मेरी नींद को दिक्कत तंबू में बैठे मेरे भगवान से है। मेरी नींद को दिक्कत […]

हम पड़ोसी को भाई समझते रहे, दोस्ती से मसायल सुलझते रहे। नक्सली बेहयाई की हद कर दिए, चोरी-चुपके से हमसे उलझते रहे।। सोते सिंहों को छेड़ा बुरी बात है, तेरे पुरखों ने खाई सदा मात है। प्राण निर्दोष के लेके धोखा किया, हम बताएंगे तेरी क्या औकात है?? शत्रु को […]

1

खुद को भूला हूँ तुमको पाने में, हर्ज़ क्या दिल से दिल मिलाने में। मेरे दिल की कली महक उठी, तुम जो आए गरीबखाने में । मेरे महबूब लौटकर आजा, बिन तेरे कुछ नहीं जमाने में। कट रहीं बिन तुम्हारे ये घड़ियाँ तेरी यादों के आशियाने में। है सितम क्या […]

एक नन्हीं-सी कली मेरी बगिया में खिली, सींचा उसे प्यार से,पर दुनिया की नज़र लगी। कहते हैं खुशियाँ बांटने से बढ़ती है, पर यहाँ लगा खुशियाँ बांटने से घटती है। मेरे नन्हे से सपनो में जैसे आँख खुल गई, ऐसे ही वो ख़ुशी मुझसे दूर चली गई। कुछ कर्ज़ बाकी […]

अगस्त माह का पहला रविवार हैl सुबह-सुबह का झुटपुटा हैl  अभी वृक्ष सोए पड़े हैंl  डालियाँ पंछियों की चहचहाहट सुनने के लिए आतुर हैं,लेकिन कहीं कोई आवाज़ नहीं,केवल एक आवाज़ को छोड़कर बादलों की गर्जन-तर्जन कभी तेज-कभी धीमी,कभी बिजली कड़कने की ज़ोर की आवाज़ हैl शायद बारिश होने वाली हैl […]

नज़र में हो कोई मुश्क़िल ज़माने की ग़ज़ल कहना, बहुत घबरा रहा हो दिल ज़माने की ग़ज़ल कहना। ——————— हमारी भूख के किस्से तुम्हारे इश्तिहारों में, तुम्हें लगने लगें बोझिल ज़माने की ग़ज़ल कहना। ——————— नज़र में दूर तक केवल समुंदर ही समुंदर हो, दिखाई दे नहीं साहिल ज़माने की […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।