बाँधकर दिल को हमारे, मुक्त ऐसे कर दिया। भूल बैठे फर्क भी हम मुक्त हैं कि कैद हैं। हम कहें तो क्या कहें, जो-जो उन्होंने कह दिया। दर्द भी दिल के हमारे, सर्द हैं खामोश हैं। फासला सोचों का है, छाया है,दिल के दरमियां। कौन सच्चा,कौन झूठा, सरपरस्त यह वक्त […]

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जलती रही जौहर में नारियां, भेड़िए फ़िर भी मौन थे। हमें पढ़ाया गया अकबर महान, तो फिर महाराणा प्रताप कौन थे? हुआ तांडव मुगलों का जब, सारा जनमानस मौन था। हुए बहुत मराठे वीर पर, शिवाजी  सबमें  शेर थे। सड़ती रही लाशें सड़कों पर, गांधी फिर भी मौन थे, हमें […]

तुम्हारे दर पर आकर के भगवन, हौले से तुमको जगा रही हूं, न कुछ मैं जानूँ,न कुछ मैं समझूं, तुम्हीं से तुमको मंगा रही हूँ। तुम्हीं सुदामा के मित्र प्यारे, तुम्हीं यशोदा की आंखों के तारे, मेरी भी बिगड़ी बनाओ प्यारे, तुम्हीं से अर्जी लगा रही हूं। तुम्हारे दर  पर […]

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दर्द-ए-दिल हद से गुजरने को है, या ये कहिए कि ठहरने को है। बुलबुले  उठ  रहे  हैं पानी  में, कुछ तो दरिया से उभरने को है। चल किनारे पे खड़े  हो जाएँ, चाँद दरिया में उतरने  को है। कोई हलचल है न कोई जज़्बा, मेरा  अहसास भी मरने को है। […]

बलात्कार एक ऐसा घिनौना कृत्य है,जिसके बारे में कई लोग बात करने से भी कतराते हैं.. यह न केवल जिस्म का होता है,वरन रुह का भी होता है। और जो इंसान इसे भोगता है,उस पीड़ित को न केवल परिवार, बल्कि पूरे समाज में उपेक्षा देखना पड़ती है, इसीलिए सरकार को […]

हिस्से में आई बेइज्जती को देख मन सुन्न हो गया रामदीन का..क्या सोचा था क्या हो गया,अपनी सगी बहन से इस बर्ताव की सपने में भी उम्मीद न थी,किस कलेजे से कह दिया भईया  रात आप भगतपुर में बिता लो,सुबह बारात विदाई के बाद चले आना,आप के ये ‘सफेद दाग’ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।