बिखराव की राजनीती करती है कांग्रेस

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amit shah

संसद लोकतंत्र के मंदिर के समान है जहांसे देश के विकास की योजनायें और नीतियाँ मूर्त रूप लेती हैं। देश कीसामाजिक, आर्थिक, सांस्‍कृतिक संपन्‍नता के लिए जनप्रतिनिधि कानून बनाने काकाम करते हैं। मुद्दों पर बहस की जाती है, जनकल्‍याणकारी योजनाएं तैयारहोती हैं। ताकि सबको समानता मिल सके। इसके लिए सरकार ही नहीं बल्कि विपक्षको एकजुट होकर बहस करने की जरूरत होती है। लेकिन जिस तरह से संसद के बजटसत्र के दूसरे चरण में कांग्रेस ने माहौल खराब किया और पूरे सत्र में बाधापहुंचाई उसके लिए लोकतंत्र की जनता कभी माफ नहीं करेगी। विपक्ष का यह गैरजिम्मेदाराना रवैय्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा गरीब कल्याण औरदेश के सर्वागीण विकास के प्रयास में अवरोध पैदा करने वाला है |

संसद का हर सत्र देश के विकास को समर्पितनीतियों एवं योजनाओं पर होने वाली बहस के लिए चलाया जाता है। जिसमेंयोजनाओं की प्रगति, योजनाओं की कमी और योजनाओं में सुधार को लेकर सभीजनप्रतिनिधियों की प्रतिबद्वता झलकती है। लेकिन कांग्रेस ने सदन जनता केप्रति प्रतिबद्वता की चिंता छोड़ बाधा पहुंचाने में महारत हासिल कर ली है।इसलिए बहस करने की बजाय हंगामा करके कामकाज में बाधा पहुंचाने का बीड़ा उठालिया। पिछले दिनों जो हुआ उसे देखकर यही लगता है कि सदन में सार्थक बहसकरने की बजाय सदन के बाहर हंगामा करने में उनकी दिलचस्‍पी ज्‍यादा दिखी। इसबात को हर देशवासी भी भली-भांति समझ रहा है। बैंक घोटाला, आंध्र प्रदेश कोविशेष राज्‍य का दर्जा, कावेरी विवाद से लेकर अविश्वास प्रस्ताव तक मेंसरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री, वित्‍त मंत्री, गृह मंत्री नेआश्‍वस्‍त किया था कि सदन को चलने दिया जाए और इन मुद्दों पर बहस कराई जाए।लेकिन कांग्रेस ने मुद्दों को छोड़ एक ही राग अलापना शुरू किया कि सरकारबहस नहीं चाहती। पूरा देश कांग्रेस के इस राग को सुन रहा है। सदन शुरू नहींहुआ कि हंगामा होने लगा। पहले सदन के बाहर हंगामा, फिर सदन के अंदरहंगामा। आशय साफ है कि हंगामा करने के मकसद से ही वे सदन में आते थे औरशुरू होते ही हंगामा करने लगते। कांग्रेस का जनकल्याण से कोई लेना देनानहीं बल्कि उनका उद्देश्य संसद के बाहर हंगामा करके बिखराव एवं अस्थिरता कीराजनीति करना है |

ऐसा हंगामा जो कि पूरा देश देख रहा है।दोनों सदनों के सभापति और अध्‍यक्ष शांत होने की अपील कर रहे हैं। लेकिनशांत होना तो दूर, उनका वेल तक पहुंच जाना रोज की बात हो चुकी थी। यह किसीभी सदन के सदस्‍य के लिए शोभा नहीं देता। करोड़ों देशवासियों की एक उम्‍मीदहोती है कि इस बार सदन में उनके लिए किन कल्‍याणकारी योजनाओं को लेकर बहसहोगी। क्‍या कानून बनेगा,विकास की राह को आगे बढ़ाने के हमारे जनप्रतिनिधिक्‍या कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस ने इसकी चिंता छोड़, झूठ का राग अलापनाशुरू कर दिया है। हम कहना चाहते हैं कि दिखावा मत करिए बल्कि मुद्दों परआकर बहस करिए। सरकार हर मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है| कांग्रेस के सुरमें सुर कुछ विपक्षी दल भी मिलाने लगे। इसी का नतीजा हुआ कि बजट सत्र केदूसरा हिस्‍से में भी 22 कार्य दिवस पूरी तरह से बर्बाद हो गए। राज्‍यसभामें हंगामे के कारण बजट सत्र के दूसरे चरण में 121 घंटे और लोकसभा में लगभग 128 घंटे बर्बाद हो गए। संसद सत्र को चलाने के लिए बड़ा बजट भी खर्च होताहैं। लोकसभा और राज्यसभा चलाने का प्रति घंटे का खर्चा क्रमशः 1.57 और 1.10 करोड़ आता है | अतः कांग्रेस और विपक्ष के गैर जिम्मेदाराना रुख के कारणबजट सत्र के सिर्फ दूसरे चरण में राज्यसभा में ही विपक्ष के हंगामे के कारणजनता के लगभग 133 करोड़ और लोकसभा में लगभग 200 करोड़ रूपये व्यर्थ हो गए | इसलिए अंतराआत्‍मा की आवाज पर हमने बजट सत्र के दूसरे चरण का वेतन भत्‍तानहीं लेने का निर्णय लिया।

हमारी प्रतिबद्वता जनता के लिए है। इसलिएप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पहली बार प्रवेश के समय सर झुकाकरनमन किया था। अपने पहले भाषण में प्रधानमंत्री ने भावुक होकर कहा कि यहसरकार गरीबों, पिछड़ों, महिलाओं और युवाओं के लिए समर्पित है। सरकार ने देशके आर्थिक विकास को रफ्‍तार देने के लिए बजट सत्र का समय बदलकर एक फरवरीकिया। ताकि समय से इसे पारित कराया जा सके और योजनाओं को गति मिल सके।लेकिन विपक्ष, खासकर कांग्रेस, नहीं चाहती कि सरकार योजनाओं को रफ्‍तार दीजा सके। इसलिए विकास की राह में रोड़ा बनकर खड़ी हो जाती है और सदन को भीनहीं चलने देती है।

आज पूरा देश देख रहा है कि कांग्रेस किसतरह का ढोंग रच रही है। हम कांग्रेस के ढोंग को जनता के बीच रख रहे हैंताकि देशवासी जान सकें कि हम जिन्‍हें अपना जनप्रतिनिधि बनाकर भेंज रहे हैंवह उनके हितों काम करने की बजाय सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों में भीबाधा पहुंचाने में विश्‍वास करते हैं।

#अमित शाह (राष्ट्रीय अध्यक्ष-भारतीय जनता पार्टी)

परिचय: अमित शाह का जन्म 1964 में मुंबई के एक संपन्न गुजराती परिवार में हुआ।सोलह वर्ष की आयु तक वह अपने पैत्रक गांव मान्सागुजरात में ही रहे और वहीँ स्कूली शिक्षा प्राप्त की। स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात उनका परिवार अहमदाबाद चला गया। बालपन में वह सदैव महान राष्ट्रभक्तों की जीवनियों से प्रेरित हुआ करते थेइसी प्रेरणा के फलस्वरूप उन्होंने भी मातृभूमि की सेवा करने और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का स्वप्न देखा। वह विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीयवादी भावना तथा उनके दृष्टांत से प्रेरित व प्रभावित हुए तथा अहमदाबाद में संघ के एक सक्रिय सदस्य बन गए। यह कदम उनके जीवन का एक ऐसा कदम था जिसने उनका जीवन सदा के लिए परिवर्तित कर दिया एवं उन्हें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व की प्रभावशाली यात्रा की और उन्मुख किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल होने के बाद अमित भाई ने संघ की विद्यार्थी शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP) के लिए चार वर्ष तक कार्य किया। भाजपा ने अमित भाई के समर्पणपरिश्रम और संगठनात्मक क्षमताओं को सम्मानित कर उन्हें 2014 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया।

अपनी अति-व्यस्तता एवं बहुत सारे सार्वजनिक कार्यक्रमों के बावजूद अमित भाई शास्त्रीय संगीत सुन कर और शतरंज खेल कर तरोताज़ा हो जाते हैं। समय मिलने पर वह क्रिकेट का भी आनन्द लेते हैं। रंगमंच में भी उनकी बहुत रुचि है तथा अपने विद्यार्थी जीवन में कई अवसरों पर वह मंच पर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।

matruadmin

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One thought on “बिखराव की राजनीती करती है कांग्रेस

  1. श्री अमित शाह जी का व्यक्तित्व बहुत ही प्रेरक है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।