मेरा हिस्सा

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ragini tripathi
रात की बाहों में,मेरे हिस्से की क्यूँ नींद नही।
फलक के तारों में  जलती कोई उम्मीद नही।।
मैं रात काट रही हूँ कि मौन है तो मेरे साथ,
फिर भी खामोशी की दुनिया हुई रंगीन नही।।
है एक नाम जहां में जो नही देता सुकूँ मुझको,
उसकी चाहत का सफर भी तो हुआ नसीब नही।
प्रेम की एक शिला पर तो मेरा नाम लिख देना,
मुझसे  कह देना की मैने कुछ तो माँगा अजीब नही।।
मैंने कब तुझसे सोने चांदी के महल मांगे हैं?
मुझको एक कफन न दे पाए इतना भी तू गरीब नही।।
सोचना मत कि दूरियां हैं ये सिर्फ बातें ही तो हैं,
तू मुझमे जितना है उतना तो कुछ भी करीब नही।।
तू वँहा रोया अकेला मैं यँहा रोती रही हूँ तुझबिन,
साथ मिलकर कभी रोते ये भी तो नसीब नही।।
#रागिनी त्रिपाठी “देवशी”

परिचय
जीवन परिचय*
रागिनी त्रिपाठी”देवशी’
पिता-स्व.श्री देवी प्रसाद त्रिपाठी
माता-स्व. श्रीमती शशी प्रभा त्रिपाठी
वर्तमानपता-गांधीनगर गुजरात 
शिक्षा – 1.परस्नातक- अर्थशास्त्र
2.परस्नातक-अंग्रेजी साहित्य
3.परस्नातक- शिक्षाशास्त्र
बी,एड तथा ऍम,एड
पी.एच.डी ( पंजीकृत)
-व्यवसाय- प्रशासनिक अधिकारी व् उपवक्ता

*प्रकाशित *
एकल- मेरे मौन के साथी
एकल- मृगतृष्णा
साँझा- हौसलों की उड़ान
साँझा- सत्यम प्रभात
साँझा – कलम के कदम
आगामी- लाडो (एकल)
What I want is still a question(मनोविज्ञान में आधारित युवा पीढ़ी को मार्गदर्शन देती एक पुस्तक)
लेख -गुफ्तगू साहित्य (क्या मैं आज़ाद हूँ?)

**विभिन्न पत्र एवम् पत्रिकाओं में लेख
1,दैनिक जागरण -रंगों से बिछड़ते बच्चे (लेख)
2,प्रशाशनिक सर्वेक्षण- तकनिकी विकास और उलझते बच्चे
3, विश्व साहित्य पुरस्कृत

**रिसर्च कार्य
1.शिक्षण एक अनुभव या समझौता
2.शिक्षक व्यवहार
3. चित्र सहायक योग्यता
4. मानव व्यवहार व् मनोविज्ञान
5. लेख (हिंदी हैं हम )
6. गीत (जब बात हो हिंदी की तो वो बात हो हिंदी) पुरस्कृत स्वामिनारायण संस्था

** पुरस्कार एवम् स्मृति पत्र
1. हिन्दुस्तान भाषा अकादमी
(हिन्दुस्तानी भाषा समीक्षा सम्मान 2015)
2. ग़ज़ल सागर साहित्य सम्मान 2014)
3. उम्मीद की किरण (साहित्य शिरोमणि सम्मान 2017)
4. बीइंग वुमन (स्वयंसिद्धा सम्मान 2017)
5.साहित्य सागर (माँ शारदे सम्मान 2017)
6. विश्व हिंदी रचनाकार मंच (हिंदी सेवी सम्मान 2017)

** शैक्षणिक क्षेत्र में प्राप्त सम्मान
1.सर्वश्रेष्ठ शिक्षिका सम्मान 2015 डी एच पटेल विद्यालय
2. सर्वश्रेष्ठ कार्य (रचनात्मक 2015)
एम् एड कॉलेज)
3. एन ओ एस ओलंपियाड सम्मान 2016
4. शिक्षक वर्कशॉप सम्मान 2016
5. एयर फ़ोर्स वेलफेयर सेक्रेटरी कार्य सम्मान 2008
6. सर्वश्रेष्ठ सहभागिता कार्य स्वामिनारायण विद्यामंदिर 
7. हिंदी सेविका सम्मान 2016 राष्ट्रिय हिंदी संस्था, गुजरात

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।