अजनबी दुनिया..

0 0
Read Time1 Minute, 36 Second

sakshi

लफ्ज़ हैं आज गुमशुदा,
एहसास हो गए हैं अब तन्हा..
दिल की सच्चाई कितना भी चाहे बेपनाह,
पर खा रही है मात हर लम्हा..
हर जगह।

वक़्त बदल-सा जा रहा है,
शख्सियत भी अब तो जुदा है..
न जाने कहाँ सब खो गया,
जज़्बातों का कारवां छूट गया है।

अफ़साने भी अब करें किससे बयाँ,
सारा जहां अजनबी-सा लगता है..
गुमशुदा यूँ हुए हम इस आपाधापी में,
कि जहां अजनबी-सा लगता है।

अक्सर इस जहां को देखकर,
यही सोचा करती हूँ..
मतलबी यहां लोग बड़े हो गए,
सच्चाई का पहन के मुखौटा,
झूठ संग लिए फिरते हैं।

हँस रहा है तू मुझ पर या,
कोई फ़साना याद आया..
नसीहत जो दी है तूने,
सच्ची है या झूठी।

बातें तेरी दिल की गहराई से,
आई या नहीं..
लग रही अब यह दुनिया मुझे
बड़ी दोगली।

#साक्षी पेम्माराजू  ‘स्वप्नाकाक्षी’

परिचय : बैंगलोर में निवास कर रही साक्षी पेम्माराजू  ‘स्वप्नाकाक्षी’ का इंदौर से भी नाता है,क्योंकि मध्यप्रदेश के झाबुआ से इन्होंने अपनी पढ़ाई की है। बचपन से हिन्दी में कविताएँ लिखने का इनका शौक अब तो जुनून है,जो स्वप्नाकशी नाम से देखने में आता है। फिलहाल यह सॉफ़्टवेयर इंजीनियर के रुप में कार्यरत हैं।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

अभिमान के वंशज बढ़ गए भोले..

Fri Feb 24 , 2017
आज अपराधी यहाँ बढ़ रहे, क्रोध-कपट की चाहत है।.. नरसंहार और प्रहार से ये धरती माता आहत है। मस्तक में हो चंद्र शीतलता, इसके लिए तुम कुछ तो बोलो.. अभिमान के वंशज बढ़ गए, भोले अब त्रिनेत्र खोलो। भावों में बढ़ रही मलिनता, रह न पाती कहीं पवित्रता.. ऊंच-नीच और […]

नया नया

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।