अंतरद्वंद

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megha yogi
बू अराजकता की फैली,मंद क्यों करते नहीं हो;
सच गलत का खुद ही अंतर द्वंद क्यों करते नहीं हो!!
लुट रही जब बेटियों की आबरू हर इक गली में;
जम गया क्या रक्त,भारत बंद क्यों करते नहीं हो!!
जो जला दे दिल में ज्वाला,गूँज से कप जाये अंबर;
आज उठ कर ऐसा सुरभित छंद क्यों करते नहीं हो!!
निम्न होती मानसिकता औ मनुजता खो गई है;
ऐ युवा खुद को विवेकानंद क्यों करते नहीं हो!!
हिंदु मुस्लिम राजनीति,धर्म पर नारे लगाते;
काम इनसे आके बाहर चंद क्यों करते नहीं हो!!
द्वेष ईर्ष्या छल कपट का अब दिलों पर राज “मेघा”;
गैर की खुशियों में भी आनंद क्यों करते नहीं हो!!
#मेघा योगी
परिचय:
नाम-मेघा योगी 
साहित्यिक उपनाम-मेघा 
वर्तमान पता- गुना 
राज्य-मध्य प्रदेश 
शहर-गुना 
शिक्षा-Bsc biotechnology PGDCA 
कार्यक्षेत्र-विद्यार्थी 
विधा -गीत,गजल,मुक्तक,छंद,लेख,लघुकथा,कहानीआदि
मोबाइल/व्हाट्स ऐप – 
प्रकाशन-देश की ईपत्रिकाओं सहित विभिन्न पत्रिकाओं एवं अखबारों में समय समय पर रचनाओं का प्रकाशन,साझा गजल संग्रह गुंजन 
सम्मान-अंतरा शब्द शक्ति सम्मान 
ब्लॉग-
अन्य उपलब्धियाँ-
लेखन का उद्देश्य -माँ हिंदी की सेवा कर आत्मसंतुष्टि को प्राप्त करना 
 
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Arpan Jain

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।