हमारी दोस्ती

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sohrab ansari

सबसे प्यारी हमारी दोस्ती,     

 सबसे न्यारी हमारी दोस्ती।

दोस्ती ने रोते को गले लगाया,

 गलत राह से हमें बचाया।

दोस्ती-दोस्ती कहने से,                             

कभी कोई दोस्त नहीं बनते।

दोस्ती करके तो देखो…,

सबसे अच्छी लगती है दोस्ती।

इस दोस्ती ने कभी रोने न दिया,             

 दोस्ती ने कभी बिखरने न दिया।

  सबसे खुशहाल हमारी दोस्ती,

 सबसे अनमोल हमारी दोस्ती।

दोस्ती-दोस्ती क्या है दोस्तों,               

 खुशियों की फुहार है दोस्ती।

   सबसे अनमोल अरशद-सोहराब की दोस्ती,    

अनोखी,अनमोल और प्यारी  दोस्ती॥

#सोहराब अंसारी

परिचय : सोहराब अंसारी का जन्म १ जनवरी २००३ को बिहार में हुआ हैI इनके पिता बैग बनाने का काम करते हैंI वर्तमान में इंदौर में निवासरत सोहराब पागानिस पागा के सरकारी विद्यालय में कक्षा आठवीं में अध्ययनरत हैI परिवार में बड़ा बेटा होने से पढ़ाई के साथ-साथ पिताजी के  काम में भी हाथ बंटाने वाले सोहराब का सपना बड़ा होकर वैज्ञानिक बनने का हैl इनको विज्ञान के प्रादर्श और परियोजनाएं बनाना बहुत रुचिकर लगता है,जिसमें सभी शिक्षक भी सहयोग करते हैंl सोहराब को लिखने का काफी शौक हैl 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।