मध्यम वर्ग की पुकार

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लॉक डाउन का मारा,
आम आदमी है बेचारा।
मिलता नहीं कोई सहारा
फिरता है अब मारा मारा।।

मार मध्यम वर्ग पर पड़ी है,
उसकी जुबान बन्द पड़ी है।
मिला नहीं पैकेज उसको,
सरकार भी मूक खड़ी है।।

जिसकी आय बहुत कम थी,
मुश्किल से होता था गुजारा।
यह वर्ग बहुत ही दुखी हैं,
कैसे करे लॉक डाउन में गुजारा।।

पास जो थोड़ी सी बचत थी,
वह भी खत्म हो चुकी है।
दाने दाने के लिए मोहताज है,
इसको ज्यादा मार पड़ी थी।।

अब किसके आगे हाथ फैलाएं,
मौत खड़ी है आगे मुंह बाए।
घर में वह बिल्कुल बन्द पडा है
जाए तो जाए वह कहां जाए ?

टैक्स भी वह पूरा भरता था,
लोन की किश्ते वह भरता था।
अपनी इज्जत बचाने के लिए,
वह यह सब कुछ करता था।।

आय के सोर्स खत्म हो चुके हैं,।
बच्चो की गुल्लके टूट चुकी है।
हर सोर्स पर हर तरफ से
उससे मुख मोड़ चुकी हैं।।

सामान के डिब्बे खाली हो चुके है,
बिजली पानी के बिल उपर चढ़े है
बच्चो की फीस है भरनी बाकी,
इतने सारे कर्ज उस पर चढ़े है।।

कर रहा था मदद गरीबों की,
जो उसके सामने दिखाई देता।
आज खुद खड़ा है मदद के लिए,
उसको कोई भी मदद नहीं देता।।

सरकार से विनती है अब मेरी,
कुछ ख्याल करो मध्यम वर्ग का।
जो अनदेखा पड़ा था अब तक,
उसको हिस्सा दो कुछ पैकेज का।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।