राहुल बारपुते पर केन्द्रित ‘समागम’ विमोचित

0 0
Read Time4 Minute, 6 Second

इंदौर। हिंदी पत्रकारिता के शीर्षस्थ संपादक स्वर्गीय श्री राहुल बारपुते के व्यक्तित्व एवम कृतित्व पर पत्रकारिता एवम जनसंचार अध्ययनशाला, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय द्वारा हिंदी दिवस पर एक विमर्श का आयोजन किया गया । इस अवसर पर शोध पत्रिका समागम का बारपुते जी पर केंद्रित विशेष अंक ‘हिंदी पत्रकारिता के बाबा’ जारी किया गया।
श्री राहुल बारपुते के जन्म शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित इस विमर्श के आरंभ में वरिष्ठ पत्रकार श्री भानु चौबे ने बाबा के साथ काम करने का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि बाबा बहुत ही उदार दिल के थे और जूनियर्स को दबाने के बजाय उन्हें सिखाया करते थे। अपने साथ बाबा की सीख को याद किया और कहा कि एक एक शब्द पर बाबा की नजर होती थी। जिन शब्दों पर बाबा को आपत्ति होती थी, उस शब्द के उपयोग पर संबंधित प्रभारी से उसका अर्थ पूछते थे। जवाब उन्हें ठीक लगता तो शाबासी देते थे। यही बात वरिष्ठ पत्रकार श्री नीलमेघ चतुर्वेदी ने कही। बाबा पर बोलते हुए वह भावुक हो गए। रुंधे गले से उन्होंने बताया कि बाबा ऊपर से सख्त दिखते थे लेकिन भीतर से नरम थे। वे अपने लोगों की खूब चिंता भी करते थे। उन्होंने कहा कि बाबा जैसे बिरले संपादकों का समय गुजर गया क्योंकि बाबा ने बढ़ा हुआ वेतन लेने से इंकार कर दिया और स्वेच्छिक गरीबी को स्वीकार किया।


बाबा के साथ अखबार के पुस्तकालय में काम कर चुके वरिष्ठ ग्रंथपाल श्री कमलेश सेन ने कहा कि मुझ जैसे छोटे से कर्मचारी को भी वे अपनी हाथों से बनी चाय पिलाते थे। उनकी यादें आज भी बसी हुई है। वरिष्ठ पत्रकार श्री मुकेश तिवारी ने कहा कि छात्र जीवन में एक ऐसा अवसर आया जब बाबा के सामने खड़ा होना पड़ा तो ऐसे लगा कि पैरों के नीचे से जमीन खिसक रही है । बाबा के पास हर समस्या का समाधान हुआ करता था।

विभागाधक्ष्य डॉ. सोनाली नरगुंदे ने अतिथियों का स्वागत किया। विमर्श में उपस्थित समागम के संपादक मनोज कुमार ने कहा कि आज हिंदी दिवस पर हिंदी के बड़े संपादक बाबा पर अंक निकालते हुए रोमांचित थे तो आज अंक समर्पित करते हुए सार्थक प्रयास महसूस करते हैं। डॉ. सोनाली नरगुंदे ने कहा कि हिंदी दिवस पर हमारे विभाग का यह नवाचार था। उन्होंने उपस्थित अतिथियों, विद्यार्थियों का आभार माना। इस खास प्रोग्राम में श्री बारपुते के सुपुत्र श्री राजीव बारपुते की विशेष उपस्थिति रही।

इस मौके पर मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ अर्पण जैन, वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ प्रेमजीत सिंह, डाॅ कामना लाड, डाॅ मनीष काले, वरिष्ठ पत्रकार श्री जितेंद्र जाखेटिया सहित अनेक प्राध्यापक, बड़ी संख्या में मीडिया के विद्यार्थी भी मौजूद थे।

matruadmin

Next Post

अ.भा. साहित्य मेला में इंदौर के हरेराम वाजपेयी और मुकेश तिवारी सम्मानित

Mon Sep 26 , 2022
इंदौर । विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) द्वारा अहमदनगर (महाराष्ट्र) में आयोजित अखिल भारतीय 18वां साहित्य मेला में इंदौर के दो वरिष्ठ रचनाकारों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार हरेराम वाजपेयी (इंदौर) को रजत पदक, मुकेश तिवारी (इंदौर) को पत्रकारश्री और मप्र की डाॅक्टर लता अग्रवाल (भोपाल) को […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।