क्या खोया क्या पाया

0 0
Read Time1 Minute, 39 Second

क्या खोया क्या पाया हमने,
आओ ज़रा विचार करें।
बीते साल के लेखे जोखे पर,
आओ सोच विचार करें।

मिली हैं खुशियां हमको कितनी,
कितने मिले हैं गम हमको।
किस किस ने हंसाया है हमको,
किस किस ने है रुलाया हमको।

विपदा में छोड़ा हाथ किसी ने,
किसी ने साथ निभाया है।
कौन है अपना कौन पराया,
ये परखना हमको आया है।

कुछ सपने साकार हुए हैं,
कुछ सपनों ने दम तोड़ा है।
खुशियों ने गले लगाया हमको,
गमों ने बेरहमी से तोड़ा है।

खूब रची रचनाएं हमने,
वाह वाह लूटी खूब है,
बीते बरस में हमने देखो,
नाम कमाया खूब है।

कोरोना ने हमें डरा कर,
ले ली हजारों जान हैं,
ना जाने कितने कष्ट दिए,
तोड़ा सबका अभिमान है।

करके बन्द घरों में हमको,
जीवन का मोल है समझाया।
अपनों के संग मिलजुल कर,
रहना प्रेम से सिखलाया।

प्रदूषण से मुक्त होकर,
धरती माँ मुस्काई है।
कोरोना ने आकर देखो,
सबको फटकार लगाई है।

विद्या के मंदिर में देखो,
भगवान नज़र ना आए हैं।
मंदिर सूना पड़ा है कब से,
भक्तों के दिल मुरझाये हैं।

कुछ तीखे से दर्द मिले हैं,
कुछ मीठे एहसास मिले।
जो बीत गया वो बीत गया,
अब ना हैं कोई शिकवे गिले।

स्वरचित
सपना स. अ.
जनपद- औरैया

matruadmin

Next Post

इन दिनों

Sun Dec 27 , 2020
सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों कुछ की बदल गयी है देखो चाल इन दिनों जो हाथ मिलाते थे अदब से करें आदाब अब पूछते नहीं हमारा हाल इन दिनों सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।। क्या बात है मचा है क्यो बवाल इन […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।