आचार्यश्री के दर्शन पाए

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जब तक सांसे चलती है,
गुरुदेव की महिमा गाऊ।
सपने में गुरु को देखू ,
जागू तो दर्शन पाऊ।
जब माया मोह में उलझा,
मन ने मुझे समझाया।
तब हाथ पकड़कर गुरु ने,
मुझे सत्य का पथ दिखलाया।
गुरु चरणों को में तज कर,
अब और कहाँ में जाऊ।
सपने में गुरु को देखू,
जागू तो दर्शन पाऊ।।
जब तक सांसे चलती है,
गुरुदेव की महिमा गाऊ।

मेरे मन का रूप दिखाये,
मुझे गुरु चरणों का दर्पण।
गुरुदेव की छाया हो तो,
टूटे पापो का बंधन।
गुरुदेव की महिमा समझू,
और दुनियां को समझाऊ।
सपने में गुरु को देखू,
जागू तो दर्शन पाऊ।।
जब तक सांसे चलती है,
गुरुदेव की महिमा गाऊ।

संसार के भाव सागर में,
गुरुदेव का मिला सहारा।
जब भाव सागर में डूबा,
तब गुरुदेव ने मुझको उभरा।
तुम गाओ राम की महिमा,
मैं विद्यासागर को ध्याऊ।
सपने में गुरु को देखू,
जागू तो दर्शन पाऊ।।
जब तक सांसे चलती है,
गुरुदेव की महिमा गाऊ।

आज शरद पूर्णिमा के दिन परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्यश्री 108 विद्यासागर जी के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में मेरा उपरोक्त भजन उनके चरणों में और आप सभी श्रावकों के लिए समर्पित है।

जय जिनेन्द्र देव
संजय जैन (मुंबई )

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।