प्यारा हिंदुस्तान

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है प्यार बहुत देश
हमारा हिन्दुतान।
है संस्कृति इसकी
सबसे निराली है।
कितनी जाती धर्म के,
लोग रहते यहाँ पर।
सब को स्वत्रंता पूरी है,
संविधान के अनुसार।।
कितना प्यार देश है
हमारा हिंदुस्तान।
इसकी रक्षा करनी है
आगे तुम सबको।।

कितने बलिदानों के
बाद मिली है आज़ादी।
कितने वीर जवानों को
हमने खो दिया।
गांधी सुभाष और भगत सिंह
चढ़े इसकी बलि।
चंद्रशेखर और मंगल पांडेय
हो गए शाहिद।
तब जाके हमको ये
मिली है आज़ादी ।।
अब देखो नेताओ का
ये नया हथकंडा,
आपास में बाट रहे
अपने ही देश को ।।

इससे उन शहीदों को
कैसे मिलेगा शुकुन।
जिन्होंने आज़ादी के
लिए गमा दिया प्राण।
क्या उन सभी
कुर्बानियां व्यर्थ जाएगी।
फिर से देश क्या
गुलाम बन जायेगा।
यदि ऐसा अब हुआ तो
सब खत्म हो जाएगा ।
भारत फिर से
गुलाम बन जायेगा।
इसका सारा दोष देश के
नेताओ को जाएगा।।
कितना प्यार देश है
हमारा हिंदुस्तान ।
इसकी रक्षा करनी है
आगे तुम सब को।।

जय हिंद जय भारत
संजय जैन (मुम्बई)

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।