प्रेमचंद चालीसा : हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक को 21वीं सदी का अभिवादन

Read Time1Second

हिंदी गद्य साहित्य का जब भी नाम लिया जाता है तो प्रमुख रूप से प्रेमचंद का नाम अवश्य आता है । युगप्रवर्तक साहित्यकार प्रेमचंद पर बहुत कुछ लिखा गया है और लिखा भी जा रहा है, इस बीच डॉ दशरथ मसानिया ने प्रेमचंद पर चालीसा लिख कर उन्हें एक सच्ची श्रद्धांजलि प्रदान किया है । इस चालीसा में प्रेमचंद के जीवन वृत्त का आद्योपांत वर्णन है । जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, शिक्षा-दीक्षा, विवाह आदि घटनाओं का काव्यमय वर्णन हृदयग्राही, सहज-स्मरणीय और प्रभावोत्पादक है । इसके साथ साथ उनकी लिखी महत्वपूर्ण कृतियों, कहानियों, उपन्यासों का भी कवि डॉ मसानिया ने अत्यंत कुशलता पूर्वक सिर्फ नामोल्लेख ही नहीं किया है बल्कि रचनाओं में किस बारे में लिखा गया है उसका भी स्पष्ट संकेत किया है जो आम साहित्य प्रेमी के साथ ही साथ विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा इसमें कोई संदेह नहीं है । उदाहरण के लिए गोदान उपन्यास की विषय वस्तु क्या है इसे हम निम्न पंक्तियों में देख सकते हैं :
गोदाना की अमर कहानी ।
सामन्त जाति पूंजीवादी ।।
होरी धनिया बड़े दुखारे ।
सारा जीवन तड़प गुजारे ।।

प्रेमचंद पर पूछे जाने वाले प्रश्नों में से अधिकांश प्रश्नों के उत्तर विद्यार्थी इस चालीसा के ज्ञान के फलस्वरूप आसानी से दे सकेंगे । तथ्यों को याद करने में चालीसा एक सुगम माध्यम है जिसे सहज ही समझा जा सकता है ।

    वस्तुतः कहा जा सकता है कि हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक प्रेमचंद के 140 वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर 'प्रेमचंद चालीसा' की रचना कर डॉ दशरथ मसानिया ने 21वीं सदी में जहां प्रेमचंद को सच्ची काव्य श्रद्धांजलि दी है वहीं सामान्य साहित्यप्रेमी, शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एक अभिनव नवाचार प्रस्तुत किया है ।

-आलोक कुमार शुक्ल,

कोलकाता ( पश्चिम बंगाल )

3 0

matruadmin

Next Post

शांति पाठ

Fri Jul 31 , 2020
फलां ने अपने समुदाय के भले का हवाला देकर दूसरे समुदाय वालों को खूब गालियां दीं। दूसरे समुदाय वालों ने भी खूब मजमा काटा बस्तियां जलीं नौकरियां गईं बहिष्कार हुआ और, और भी बहुत कुछ हुआ जो नहीं होना चाहिए था पर हो भी वही सकता था। तब फलाँ ने […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।