मेरा भारत महान

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मिल जाए लिखी अच्छी बाते,
उस पर अम्ल होना चाहिए।
भले ही मेरा भारत महान नहीं,
उसे हमेशा महान कहना चाहिए।।

करना चाहती है वे देह व्यापार,
पर उसे वैश्या कोई भी ना कहे।
अच्छा है उनको फिल्म इंडस्ट्री में
अच्छी हीरोइन बन जाना चाहिए।

बोलता रहे झूठ भरी अदालत में,
पर उसे सजा न मिलनी चाहिए।
अच्छा है किसी शहर में जाकर
बड़ा वकील बन जाना चाहिए।।

चलती रहे उसकी तानाशाही,
कोई उसका विरोध भी न करे।
अच्छा है वह किसी अदालत में,
न्यायधीश बन जाना चाहिए।।

चाहता है अगर करना लूट मार,
पर उसे कोई डाकू लुटेरा न कहे।
अच्छा है उसको इस देश का,
एक राजनेता बन जाना चाहिए।।

चाहते है सुख मांस मदिरा स्त्री का
कोई भी भोगी आपको न कहे।
बना लो कोई बढ़िया सा आश्रम,
उसका धर्म गुरु बन जाना चाहिए।

चाहते आप सबको बदनाम करना,
कोई भी आपको बदनाम न करे।
लेे लो एक माइक हाथ में तुम,
प्रेस रिपोर्टर बन जाना चाहिए।।

करे न कोई बाल बांका तुम्हारा,
करे न बुराई गंदे इल्जाम की।
ले लो नागरिकता तुम भैया,
इस सच्चे भारत महान की।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।