रेडियो स्टेशन जम्मू द्वारा सरकार के विरुद्ध दुष्प्रचार रोकने एवं व्यवस्था सुधारने हेतु प्रार्थना पत्र

Read Time2Seconds

सेवा में,
प्रधानमंत्री दामोदर भाई नरेंद्र मोदी जी,
भारत सरकार नई दिल्ली।
दिनांक: 14 मार्च 2020
विषय: रेडियो स्टेशन जम्मू द्वारा सरकार के विरुद्ध दुष्प्रचार रोकने एवं व्यवस्था सुधारने हेतु प्रार्थना पत्र।

आदरणीय महोदय,
जय हिंद!
आदरणीय माननीय सम्माननीय प्रधानमंत्री दामोदर भाई नरेंद्र मोदी जी एवं सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी आपको बताना मेरा मौलिक कर्तव्य है कि रेडियो स्टेशन जम्मू के उच्च अधिकारी आपकी पारदर्शी सरकार के विरुद्ध दुष्प्रचार कर व्यवस्था को तार-तार कर रहे हैं।जिसके लिए मैं पहले भी कई बार सूचित कर चुका हूँ।सर्वप्रथम निदेशक एस.के मल्होत्रा एवं रेनु रैणा जी कहती हैं कि साहित्कारों, लेखकों एवं कवियों के लिए मोदी सरकार प्रयाप्त धन नहीं दे रही, जैसे कांग्रेस सरकार देती थी।इसलिए हम कांग्रेस की भांति लेखकों को पूर्व अनुबंध अर्थात कंट्रेक्ट नहीं दे सकते।जिसके विरुद्ध मैंने आपको अनेक बार प्रार्थना की थी।जिसपर यह अधिकारी सरकार को बता देते थे कि उक्त लेखक को हम जानते नहीं हैं।चूंकि उस समय पहले वाली निदेशका सेवानिवृत हो चुकी थीं और प्रोग्रांम हैड श्री एस.के. मल्होत्रा पुंछ स्थानांतरित हो चुके थे।
उसके बाद 16 अक्तूबर 2019 को प्रोग्राम हैड रेणु रैणा द्वारा लिखित पत्र मुझे 22 अक्तूबर को मिला था।जिसमें मुझे पुस्तकों सहित बुलाया गया था।जिसके अंतर्गत मैं 23 अक्तूबर को वहां पहुंचा और मेरी 2 पुस्तकें कड़वे सच मूल्य ₹ 195 और मुझे न्याय दो मूल्य ₹ 399 ले लीं।जब मैंने कहा था कि मैं पुस्तकें मुफ्त में नहीं देता,तब रेणु रैणा जी ने कहा था कि उक्त पुस्तकें अध्ययन हेतु लि गई हैं बाद में लौटा देंगे।किंतु अभी तक ना तो पुस्तकें लौटाई और ना ही उनका मूल्य चुकाया है।इसके अलावा रेणु रैणा जी ने बाकी लेखकों की भांति हर तीन माह में एक कार्यक्रम देने का भी विश्वास दिलाया।
माननीय प्रधानमंत्री जी मेरी इच्छा के विरुद्ध मुझे हिंदी में कार्यक्रम ना देकर रेडियो के सेवानिवृत वयोवृद्ध पूज्य अधिकारी श्री सी.एल. शर्मा जी ने मुझे डोगरी में रिकार्डिंग देने के लिए विवश किया।जबकि मैं अपनी वर्तमान राष्ट्रभक्ति की हिंदी ग़ज़लें प्रस्तुत करना चाहता था।जिन्हें उन्होंने जानबूज कर नकार दिया था।
माननीय प्रधानमंत्री जी तीन तीन माह बीत जाने के बाद भी जब मुझे कार्यक्रम का कांट्रेक्ट नहीं मिला।तब मैंने फोन करने आरम्भ किये।जिन्हें आदरणीय रेणु रैणा जी ने कभी उठाया ही नहीं।हां सी.एल. शर्मा जी का फोन आया।जिन्होंने बार-बार फोन ना करने का मुझे आदेश दिया।जिसके बाद मैंने सरकारी अणुडाक द्वारा पूछना आरंभ कर दिया।जिस पर आदरणीय रेणु रैणा जी ने अणुडाक द्वारा ही उत्तर दिया कि सरकारी फोन प्रोग्राम हैड श्री एस.के. मल्होत्रा जी को दे दिया था।चूंकि वह मेरे सीनीयर हैं।
माननीय प्रधानमंत्री जी अब रेडियो के सेवानिवृत पुज्य वयोवृद्ध अधिकारी श्री सी.एल. शर्मा जी ने 28 फरवरी को फोन कर रिकार्डिंग हेतु बुलाया।वहां जाने पर उन्हीं सेवानिवृत वयोवृद्ध अधिकारी श्री सी.एल. शर्मा जी ने अपने केबिन में मेरी पदयात्रा वाली ग़ज़लों को नकारते हुए दूसरी ग़ज़लों को रिकार्डिंग रूम में ले जाकर रिकार्डिंग करवाई थीं।जिसके उपरांत उन्होंने रेणु रैणा जी को बताया कि ग़ज़लें अत्यंत प्रभावशाली हैं।उन्होंने यह भी विशेष रूप से बताया कि इनसे इस विश्वास पर कंट्रेक्ट साइन करवाया है कि 12 मार्च रात 8 बजे प्रोग्राम प्रसारण करने के तुरंत बाद इनको कंट्रेक्ट की कापी दे दी जाए गी।
माननीय प्रधानमंत्री जी 12 मार्च रात 8 बजे मेरे कार्यक्रम के स्थान पर किन्हीं अन्य लेखकों का प्रसारण हुआ।जिससे मेरा अत्यंत असहनीय अपमान हुआ।
दूसरे दिन जब सुबह 9 बजे मैंने पूज्य वयोवृद्ध सेवानिवृत अधिकारी चूनी लाल शर्मा जी को फोन कर अपमान एवं विश्वासघात के कारणों को जानने के लिए पूछा, तो उन्होंने हिचकाते हुए दिल्ली की सिफारस का हवाला देते हुए समझाने का अनावश्यक प्रयास किया।किन्तु जब मैंने सीधे ही पूछा कि मेरे कार्यक्रम को रद्द करने के लिए दूसरे लेखकों से आपने कितना धन लिया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली थी?जिसपर मुझे यह डर सताने लगा कि कहीं उन्हें, रिश्वत लेने के स्पष्ट प्रश्न पर हृदय अघात ना हो गया हो।क्योंकि फोन में उनके खांसने की ध्वनी तो आ रही थी, किंतु वह प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहे थे।यह डर तब समाप्त हुआ।जब रेडियो स्टेशन से उनकी सहायक का फोन आया।जिन्होंने बताया कि वयोवृद्ध अवस्था के कारण उन्होंने आपको गलत तिथि बता दी थी।जबकि आपका कार्यक्रम 26 मार्च को रिले होना है।जब मैंने उन सहायक महोदया से पूछा कि पूज्य चूनी लाल शर्मा जी सेवानिवृती के बाद भी 80 वर्ष की आयु में यहां क्या कर रहे हैं?तो उन्होंने बताने से इन्कार करते हुए कहा कि उनका कोई दोष नहीं है।आगे से आपको पहले से ही कंट्रेक्ट दे दिया जाएगा।इतना कहने पर दोपहर तक पूज्य चूनी लाल शर्मा जी अपनी दलाली की पोल खुलते देख दिल्ली के निर्देशों का हवाला देते हुए तू-तड़ाक पर आ गए।
माननीय प्रधानमंत्री जी असल बात यह है कि अग्रिम कंट्रेक्ट देने पर इनकी चौधर समाप्त हो जाती है और रिश्वत लेने के साधन भी कम हो जाते हैं।जिससे चाचा-भतीजा वाद का खेल भी समाप्त हो जाता है।इसलिए यह सरकार के निर्धारित नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर अपनी व विशेष लेखकों का अपमान करते व करवाते हैं।
वर्ना माननीय प्रधानमंत्री जी आप ही बताओ कि यह कैसे माना जा सकता है कि इनको दिल्ली से भारत सरकार की
प्रसार भारती के चेयरमैन ए.सूर्या प्रकाश जी या माननीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जी का मेरे कार्यक्रम को रद्द कर अन्य अपने चेहेतों का कार्यक्रम प्रसारित करने का निर्देश दे रहे हो?यह भी कैसे मान लिया जाए कि सीएए के पक्ष में लिखी ग़ज़लें प्रसारण ना करने का आदेश भी माननीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जी कर रहे हों?
अतः माननीय प्रधानमंत्री जी अपनी पारदर्शी सरकार के कुशल कौशलीय व्यवस्था के स्वास्थ्य को स्वस्थ बनाए रखने के लिए ऊपरोक्त विषय की गंभीरता से ठोस जांच के आदेश करें।ताकि वह नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सरकार के विरुद्ध दुष्प्रचार ना कर सकें।अन्यथा अब मैं सूचना के अधिकार का प्रयोग करते हुए धरना-प्रदर्शन भी करूंगा।चूंकि मेरे धैर्य की सीमा पार हो चुकी है।सम्माननीयों

प्रतिलिपि सेवा में: सर्वश्री माननीय महामहिम राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद जी और पूज्य वयोवृद्ध सी.एल. शर्मा, आदरणीय रेणु रैणा जी व श्री एस.के. मल्होत्रा जी को सूचना एवं त्वरित कार्रवाई हेतु।

प्रार्थी
इन्दु भूषण बाली
आरएसएस के स्वयंसेवक, पत्रकार, चिंतक, आलोचक, हिंदी+अंगरेज़ी+डोगरी लेखक, विचारक, शोधकर्ता एवं भारत के राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी समीप महावीर मंदिर खौड़ कैंप,
डाकघर व तहसील:- खौड़
जिला:- जम्मू
प्रदेश जम्मू व कश्मीर

0 0

matruadmin

Next Post

रिसॉर्ट का खेल

Sat Mar 14 , 2020
मध्य प्रदेश में जो रिसॉर्ट का खेल अभी चल रही है वह पुरे देश में चर्चा में है। कुछ लोग तो ऐसे है जिन्होंने रिसॉर्ट का नाम ही इससे पहले कभी सुना नहीं था। हॉ इससे पहले फार्म हाऊस प्रयोग राजनीति में होते रहे है। लेकिन अबकि बार मध्य प्रदेश […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।