मातृभाषा ने किया कविताकोश का अभिनंदन

0 0
Read Time1 Minute, 12 Second

ललित कुमार जी व शारदा सुमन जी का किया सम्मान

इन्दौर।

हिन्दी प्रचार के लिए प्रतिबद्ध मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा हिन्दी के सबसे समृद्ध अन्तरताना कविताकोश के संस्थापक ललित कुमार जी व निदेशक शारदा सुमन जी का अभिनदंन किया।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’, प्रसिद्ध बाँसुरी वादक एवं वरिष्ठ पत्रकार आलोक वाजपेयी, हिन्दी योद्धा जलज व्यास ने मातृभाषा उन्नयन संस्थान की ओर से विद्वजनों का अभिनंदन किया।
ज्ञात हो कि श्री ललित कुमार जी देश में दिव्यांगजनों के रोल मॉडल है और कविताकोश एवं गद्यकोश के माध्यम से आप हिंदी साहित्य जगत को सशक्त और समृद्ध घटक उपलब्ध करवा रहें है। इन अन्तरतानों से लाखों लोग जुड़े हैं

matruadmin

Next Post

देखिए

Mon Mar 2 , 2020
राजनीति का चलता खेल देखिए स्वार्थ का कैसा घालमेल देखिए। शान्त कर देते हैं ये अशान्त, मित्रों इनका चल रहा ऐसा रोल देखिए। दशकों से रोज ही गिरती नीतियां वहां कोई न इनका शत्रु रीति देखिए। सत्ता हित सब त्याग प्रीत हो जाती कब रुकेगी दिल्ली भयभीत देखिए। भाई चारे […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।