प्रार्थना पत्र 10

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सेवा में,
श्री नरेंद्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री भारत सरकार,
नई दिल्ली।
दिनांक: 26 जनवरी 2020
विषय: नागरिकता संशोधन कानून CAA के पक्ष में पदयात्रा की समय रहते तुरंत अनुमति हेतु आवेदन-पत्र।

आदरणीय महोदय

  प्रधानमंत्री जी आज गततंत्र दिवस है और चारों ओर राष्ट्रगान के जन गण मन रूपी स्वर सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है जो अति मनभावन है।
  उस पर आप द्वारा भारतीय विद्यार्थियों को परीक्षा पे चर्चा एवं महामहिम राष्ट्रपति द्वारा वीर बच्चों को पुरस्कृत करने उपरांत उन्हें उनके कर्तव्यों के प्रति प्रेरणा देना सोने पे सुहागा अनुभव हो रहा है।जिससे मेरे घावों को मरहम लग रही है और सुकून मिल रहा है।जैसे पूरण भगत की सौतेली मां के झूठे आरोपों के कारण सूखा बाग गुरु गोरख नाथ जी के आने पर हरा हो गया था।
  किंतु इसके बावजूद बताना मेरा राष्ट्रीय कर्तव्य है कि राष्ट्रीय कर्तव्य निभाना कितना कठिन एवं कष्टदायक होता है।जो मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता।प्रधानमंत्री जी आप स्वयं भी जानते हैं कि राष्ट्र की सीमा के उस पार के शत्रुओं से सीमा के भीतर छुपे राष्ट्रीय शत्रु कहीं अधिक घातक होते हैं।जो किसी भी सूरत में देश के प्रति समर्पित राष्ट्रभक्तों को राष्ट्रीय धर्म अर्थात राष्ट्रीय कर्तव्य निभाने नहीं देते।और तो और वह उक्त शत्रु को मरने भी नहीं देते।
  इसलिए सीमा पार के शत्रुओं पर सर्जीकल स्ट्राइक से सीमा के भीतरी शत्रुओं पर सर्जीकल स्ट्राइक अत्यंत कष्टदायक है।जैसे नोटबंदी से लेकर नागरिकता संशोधन कानून तक की सर्जीकल स्ट्राइक से गुस्साए शत्रुओं ने आगजनी व हिंसा फैला कर राष्ट्रीय सम्पति जलाई है।जो आपके स्पष्टीकरण के बावजूद भी शाहीन बाग में विरोध कर रहे हैं।
  आदरनीय माननीय सम्माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अल्प विचार करके देखो कि जब आप और सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी को राष्ट्र के शत्रु राष्ट्रीय कर्तव्य पालन में कातिल जैसे अनेक घृणात्मक शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं।तो वह सत्तासीन के समय देश के प्रति समर्पित आम राष्ट्रभक्त नागरिकों एवं कर्मचारियों की  क्या दुर्दशा करते होंगे? इस पर मंथन करने पर मेरा दावा है कि अनेक पीड़ित-प्रताड़ितों की आकृतियां आपके सामने आएंगी।जिनमें से एक आकृति मेरी भी होगी।क्योंकि जो सब मैंने झेला है।उन्हीं साक्ष्यों के आधार पर कह रहा हूँ।यूँ भी मानवता एवं राष्ट्रभक्ति के दण्ड़ स्वरूप जो उत्पीड़न मैंने सहे हैं।उन्हें राष्ट्र के समक्ष रखने से पहले मरना नहीं चाहता।इसलिए मानव की मानवीयता और राष्ट्र की राष्ट्रीयता बचाने के लिए मुझे पदयात्रा की अनुमति दें। राष्ट्र के शत्रुओं की क्रूरत्म से क्रूरत्म अमानवीय मानसिकता बता कर साक्ष्यों सहित उनके शाहीनबागों को तौहीनबागों में परिवर्तित करने हेतु मुझे शीघ्र पदयात्रा की अनुमति दें।
  प्रधानमंत्री जी मेरी दूरदृष्टि को न्यायपालिका में व्याप्त चरम भ्रष्टाचार के कारण मेड़ीकल बोर्ड के डाक्टरों द्वारा मानसिक स्वस्थ का प्रमाणपत्र जारी करने के बावजूद न्यायालय के भ्रष्ट न्यायधीशों ने मुझे मानसिक रोगी माना और मेरी पीड़ा-प्रताड़ना एवं तपेदिक रोग के उपचार के स्थान पर मानसिक उपचार का आदेश पारित कर दिया गया था।जिसकी पीड़ा मैं आज भी अनुभव कर रहा हूँ। इसी आधार पर मैं पीड़ित-प्रताड़ित एवं उत्पीड़ित शरणार्थियों की पीड़ा भलिभांति समझता हूँ।इसलिए ऊपरोक्त धर्मयुद्ध में मैं आपके पक्ष में पदयात्रा रूपी शस्त्र सहित भाग ले रहा हूँ।ताकि हिंसका अमानवीय प्रावृतियों वाले विपक्षियों की विचार-धारा का संहार करते हुए इनके द्वारा किए गए काले कारनामों का काला-चिट्टा राष्ट्र के समक्ष रख सकुं।यह बताना भी अति आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है कि यदि उस बुरे समय में मुझे पंजाब केसरी व उसके सम्माननीय मालिकों सर्वश्री विजय चोपड़ा एवं उनके बेटे श्री अविनाश चोपड़ा जी का आशीर्वाद ना होता तो मैं आज जीवित ही नहीं होता।जो मेरी  आठ पुस्तकों में भी प्रकाशित हो चुका है।
  इसलिए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व गृहमंत्री अमित शाह जी मुझे एक आम नागरिक के रूप में राष्ट्रभक्ति अर्थात राष्ट्रधर्म सहित मेरे राष्ट्रीय कर्तव्यों को निभाने हेतु एसडीएम कार्यालय खौड़ जिला जम्मु से प्रधानमंत्री कार्यालय दिल्ली तक की पदयात्रा की तुरंत अनुमति देकर अपना कर्तव्य सम्पूर्ण करें।सम्माननीयों जय हिंद

प्रार्थी
इन्दु भूषण बाली
जिला:- जम्मू
प्रदेश जम्मू व कश्मीर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।